- गेहूं के दाम बीस रुपये से घट 15 रुपये प्रति किलो तक गिर गए
- कार्ड धारकों को मुफ्त मिल रहा प्रति यूनिट तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत/बड़ौत/खेकड़ा। बाजार में गेहूं की कीमत धड़ाम हो गई है। आम दिनों में बीस रुपये प्रति किलो तक बिकने वाला गेहूं वर्तमान में 14 से 15 रुपये किलो तक ही बेचा जा रहा है। गेहूं को घर में ही स्टॉक कर बरसात में बेचकर आर्थिक सहारा पाने की जुगत लगाने वाले किसानों को दाम गिर जाने से जोर का झटका लगा है। कीमतें गिरने की सबसे बड़ी वजह कोरोना संक्रमण काल के लिए मुफ्त में बांटा जा रहा चावल और गेहूं है। एक यूनिट पर तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल राशन कार्ड धारकों को दिया जा रहा है। मुफ्त में मिल रहे गेहूं को कालाबाजारी के जरिये बाजार तक भी पहुंचाया जा रहा है। यही वजह है कि गेहूं के दाम सिर्फ 14 से 15 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं।
अप्रैल से नवंबर तक दी गई राहत
बागपत। जिला आपूर्ति अधिकारी अभय प्रताप सिंह का कहना है कि कार्ड धारकों को अप्रैल से नवंबर तक प्रति यूनिट तीन किलो गेहूं और दो किलो चावल मुफ्त दिया जा रहा है। सरकार के आदेश पर प्रति माह वितरण किया जा रहा है। अगर कहीं गलत तरीके से बिक्री की जा रही है, तो इसकी जांच की जाएगी।
पर्याप्त मात्रा में मिल रहा राशन, बाजारों में बेचा जा रहा
बड़ौत। अमीनगर सराय रोड स्थित आटा चौकी के मालिक फिरोज के अनुसार कोरोना काल मेें गरीबों व मध्य वर्ग के परिवार के लोगों को सरकार पर्याप्त मात्रा में राशन के रूप में गेहूं बंटवा रही है। इससे लोगों को अब गेहूं की जरूरत नहीं रह गई है। सरकार से मिलने वाले गेहूं से पूरे महीने का काम चलने के बावजूद काफी मात्रा में गेहूं बच जाता है, जिसको बाद में लोग बाजारों में बेचकर अपनी जरूरत का अन्य सामान खरीद रहे है। यह भी गेहूं के दामों में गिरावट का मुख्य कारण है। कोरोना काल से पहले गेहूं का दाम 20 रुपये प्रति किलो था, जो अब घटकर मात्र 14 से 15 रुपये रह गया है।
मुफ्त के राशन के लिए बढ़ गए 17 हजार कार्ड धारक
बागपत। जिले में मुफ्त का राशन मिलना शुरू होते ही 17 हजार राशन कार्ड धारक बढ़ गए हैं। वर्तमान में जिले में दो लाख दो हजार राशन कार्ड धारक है। कोरोना संक्रमण काल से पहले जिले में राशन कार्ड धारकों की संख्या एक लाख 85 हजार थी।
किसानों का होना चाहिए इंतजाम
- भारतीय किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अन्नू मलिक का कहना है कि बरसात के दिनों में किसान अपनी फसल छोटे-छोटे हिस्सों में बेचकर घर का गुजारा करते हैं। आर्थिक स्थिति को संभालने के लिए यह पुरानी रवायत है। लेकिन इस बार गेहूं के दाम गिर जाने से किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। सरकार को जरूरतमंद किसानों की गेहूं बिक्री का इंतजाम करना चाहिए।
- भाकियू के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर का कहना है कि मुफ्त के राशन से जरूरतमंदों को लाभ हुआ है, लेकिन कुछ लोग सरकार की योजना को पलीता लगा रहे हैं। इसका नुकसान जरूरतमंदों और किसानों को भी उठाना पड़ रहा है। जिन लोगों को जरूरत नहीं है, उन्हें चाहिए कि जरूरतमंदों के लिए योजना को चलने दें। बाजार प्रभावित होने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।