स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा फायर विभाग
बड़ौत। गर्मी बढ़ने पर आग लगने की घटनाएं भी बढ़ रही हैं। वहीं, नगर का दमकल विभाग स्टाफ और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। इसके चलते यहां हमेशा बड़े नुकसान का खतरा रहता है। अकसर दमकल विभाग की गाड़ी जब तक मौके पर पहुंचती है, तब तक सब कुछ जलकर राख हो जाता है। ऐसा ही दिल्ली बस स्टैंड के पास स्थित दुकानों में आग लगने के बाद हुआ।
पूरे जिले में हैं बस चार गाड़ियां
दमकल विभाग के पास आग बुझाने के लिए जिले में सिर्फ चार गाड़ियां हैं। इनमें 5-5 हजार लीटर क्षमता की दो गाड़ी हैं। एक बड़ौत और एक खेकड़ा में रहती है। 25 लीटर क्षमता की दो गाड़ियां हैं, जिनमें एक बागपत और दूसरी खेकड़ा में रहती है। इसके अलावा 350 लीटर क्षमता की वाटर मिस्ट है, जो कोरोना संक्रमण के दौरान सैनिटाइजर के छिड़काव का काम करती है। एक फायर बुलेट खेकड़ा में है।
दमकल विभाग के स्टाफ का हाल
दमकल विभाग के पास 11 सिपाही बागपत में, नौ बड़ौत और सात खेकड़ा में हैं। एक हवलदार बागपत, दो बड़ौत और एक खेकड़ा में है। सेकेंड अफसर एक बागपत में हैं, जो बड़ौत का काम भी देखते हैं। एक सेकेंड अफसर खेकड़ा में हैं।
मेडिकल छुट्टी पर हैं बड़ौत के एफएसओ
बावली रोड स्थित दमकल विभाग मेें तैनात एफएसओ अबू हसन 15-20 दिनों से मेडिकल लीव पर हैं।
आग लगने की वजह
शहरी क्षेत्रों में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट सामने आता है। इसके अलावा देहात क्षेत्रों में जर्जर विद्युत लाइन, फसल के अवशेषों को जलाने और कूड़े के ढेर व बिटौड़ों में आग लगने की घटनाएं होती हैं।
आग बुझाते वक्त पानी हुआ खत्म
हाईवे पर तीनों दुकानों में आग लगने के बाद एक तो फायर ब्रिगेड आधा घंटे बाद आई। ऊपर से बीच में ही पानी खत्म हो गया। टंकी को फुल नहीं किया गया था।