पिता ने ही डेढ़ लाख में सुपारी देकर कराई थी गौरव की हत्या
नशे में आएदिन परिवार के साथ मारपीट करता था बेटा, पिता समेत तीन आरोपी गिरफ्तार
अमर उजाला ब्यूरो
बागपत। सिंघावली अहीर थाना क्षेत्र के हिसावदा गांव के जंगल में समयपुर बादली के गौरव की हत्या का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। गौरव की नशे की आदत और आएदिन घर में मारपीट करने से परेशान होकर शिक्षक पिता ने ही डेढ़ लाख रुपये में सुपारी देकर हत्या कराई थी। पुलिस ने मृतक के पिता और अन्य दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
एसपी अभिषेक सिंह ने बताया कि 18 सितंबर को हिसावदा के जंगल में गौरव की गोली मारकर हत्या की गई थी। 19 सितंबर को मृतक के पिता कृष्णपाल ने अज्ञात हत्यारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने जांच की तो सच सामने आ गया। सिंघावली अहीर पुलिया से समयपुर बादली और मूल रूप से सैड़भर निवासी कृष्णपाल, नंदनगरी दिल्ली निवासी मनोज उर्फ सूरज और सैड़भर निवासी लियाकत को गिरफ्तार किया गया। अभियुक्त लियाकत के कब्जे से एक तमंचा, दो कारतूस बरामद किए। कृष्णपाल मूल रूप से जिले के सैड़भर गांव का ही निवासी है। उसने सैड़भर निवासी प्रॉपर्टी का काम करने वाले लियाकत को बेटे की हत्या की सुपारी डेढ़ लाख रुपये में दी थी। लियाकत ने अपने साथ दिल्ली के मनोज को मिला लिया। दोनों ने गौरव को हिसावदा के जंगल में ले जाकर हत्या कर दी और शव को ईख के खेत में फेंक दिया।
इसलिए करा दी बेटे की हत्या
मास्टर कृष्णपाल ने पुलिस को बताया कि उसका बेटा गौरव नशे का आदी था। चरस गांजे का नशा करता था। उसकी व उसकी घरवाली संतो देवी की बेइज्जती करता था। गौरव अपने हिस्से की जमीन को कई महीने से बेचने की कोशिश कर रहा था। मां के जेवर बेचने की कोशिश की और घर में नुकसान किया। इसी वजह से गौरव को मारने की योजना बनाई। लियाकत ने डेढ़ लाख रुपये में सुपारी ली। वारदात से पांच दिन पहले लियाकत ने नंदनगरी दिल्ली जाकर मनोज उर्फ सूरज से बात की। इसके बाद हत्या की गई। गौरव पर समयपुर बादली थाने में सात मुकदमे दर्ज थे।
इस तरह अंजाम दी थी वारदात
18 सितंबर को कृष्णपाल ने लियाकत को दिल्ली की आजादपुर मंडी में बुलाया। इसके बाद गौरव को उसकी गाड़ी लेकर जमीन दिखाने के बहाने बुलाया। लियाकत और गौरव दिल्ली से चल दिए। नंदनगरी के पास मेन रोड पर मनोज मिला, दोनों ने उसे भी साथ ले लिया। गौरव गाड़ी चला रहा था। लियाकत गौरव के पीछे वाली सीट पर बैठा था और मनोज गौरव के बराबर वाली सीट पर बैठ गया। हिसावदा गांव पार करके जैसे ही नहर की पुलिया पर पहुंचे तो गौरव से कहा कि इसी पुलिया से बाई तरफ खड़ंजे पर जमीन देखनी है। गौरव ने गाड़ी को खड़ंजे पर मोड़ दिया। करीब 100 मीटर चलने के बाद कार में ही गोली मारकर गौरव की हत्या कर दी गई। इसके बाद उसे गाड़ी से खींचकर ईख के खेत में डाल दिया। गाड़ी को ट्रोनिका सिटी थाने के पास छोड़कर फरार हो गए।