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Baghpat News: किसानों को उड़द व मूंग की दाल के बीज पर मिलेगा अनुदान

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-जिले में किसानों के लिए 30.40 क्विंटल उड़द व 128 क्विंटल मूंग का बीज आया
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। सह फसली खेती के लिए किसानों को अनुदान पर नई प्रजापति का उड़द और मूंग की दाल का प्रमाणित बीज उपलब्ध कराया जाएगा। डीबीटी (डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर) के माध्यम से अनुदान खाते में जाएगा। किसानों के लिए बीज जिले में आ गया है और बीज लेने के लिए किसान 20 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं।
जिले में गन्ने व गेहूं की सबसे अधिक खेती होती है। डिजिटल क्रॉप सर्वे में पता चला है कि जिले में 800 हेक्टेयर भूमि पर धान की फसल उगाई जाती है। इसकी रोपाई फरवरी के अंतिम सप्ताह से 15 मार्च तक किसान करते हैं। फसल तैयार होने के बाद पराली जलाने का भी झंझट रहता है। इन तमाम मुद्दों को लेकर कृषि विभाग साठा धान की खेती करने वाले किसानों को उड़द और मूंग की खेती करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।
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दलहनी फसलों में लागत भी काम आती है और उत्पादन भी बेहतर होता है। यह फसलें किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित होती हैं। अनुदान पर बीज भी मिल जाता है। जिला कृषि अधिकारी बाल गोविंद यादव ने बताया कि उड़द व मूंग का बीज प्रति हेक्टेयर में 10-15 किलो लगता है और 40 से 70 क्विंटल उत्पादन होता है। जिले में 152 हेक्टेयर के लिए 30.40 क्विंटल उड़द व 643 हेक्टेयर के लिए मूंग का बीज किसानों को दिया जाएगा।
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इस बार भी इतनी ही मात्रा में मिनी बीज किट मिलने की उम्मीद है। इस प्रत्येक किट में दो किग्रा बीज होता है। प्रति हेक्टेयर में 15-20 किग्रा बीज लगता है। एक किसान को एक ही मिनी बीज किट मिलेगा। उन्होंने कहा कि जो किसान सबसे पहले आवेदन करेगा उनको बीज दिया जाएगा। किसान अनुदान पर बीज प्राप्त करने के लिए 20 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं।


साठा धान उगाने से नुकसान

- मिट्टी यदि रेतीली है तो उसमें हर दो दिन में सिंचाई करनी होती है।

- सप्ताह में दो बार और फसल तैयार होने तक 25 बार सिंचाई करनी होती है।

- एक किलो चावल तैयार होने में 4800 लीटर पानी खर्च होता है।




उड़द-मूंग की खेती फायदे का सौदा

- यह फसल चार से पांच बार की सिंचाई में हो जाती है।
- उड़द व मूंग की बिक्री भी आसानी से हो जाती है।

- इन पर प्रति किलो बीज पर 50 प्रतिशत छूट मिलती है।
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