फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बासमती धान की खरीद न होने से किसान परेशान

विज्ञापन
विज्ञापन
खेकड़ा। सरकारी धान खरीद केंद्रों का बागपत के धान उत्पादक किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि उन पर केवल मोटे चावल की कॉमन प्रजाति के धान की ही खरीदारी होती है। जबकि जनपद का किसान बासमती धान का उत्पादन करते हैं। जनपद में बासमती धान की सरकारी केंद्र पर खरीद न होने पर किसानों को हरियाणा की मंडी में धान की बिक्री करनी पड़ रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से खरीद केंद्रों पर बासमती धान की खरीद कराने की मांग की है।
विज्ञापन

जिला बागपत में 10 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर धान की खेती होती है। किसान अच्छी कीमत लेने के लिए बासमती की प्रजाति सुगंधा, तुड़ल, 1121 आदि का धान का उत्पादन करते हैं। सरकार प्रतिवर्ष धान का एमएसपी मूल्य घोषित करती है। इस मूल्य पर धान की खरीद करती है। बागपत जनपद में भी वह धान की खरीद के लिए आरएफसी के दो खरीद केंद्र खुलवाती है। इनमें एक केंद्र बागपत और दूसरा खेकड़ा की कृषि उत्पादन मंडी में खुलता है, लेकिन इन दोनों ही केंद्रों पर यहां के किसानों के धान के एक दाने की भी खरीद नहीं होती। उन्हें अपने धान को हरियाणा की मंडियों में ले जाकर बेचना पड़ रहा है।
धान उत्पादक किसान सत्यवीर त्यागी, सतपाल सिंह, मुकेश कुमार, राज कुमार, प्रदीप, राजेश, विनोद आदि बताते हैं कि सरकार जिस धान का समर्थन मूल्य घोषित करती है। वह कामन प्रजाति मोटे चावल का होता है। सरकार उसी की खरीद कराती हैं। उसकी बाजारी कीमत दो हजार रुपये से कम ही होती है। जबकि बासमती धान का बाजारी भाव तीन हजार रुपये क्विंटल के करीब होता है। इसलिए जनपद के किसानों को जनपद के धान खरीद केंद्रों का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन उन्हें ट्रैक्टर ट्रॉली से धान को हरियाणा की नरेला और गन्नौर मंडी में ले जाना पड़ रहा है। इसमें उसका समय और पैसा बर्बाद हो रहे हैं। उन्होंने पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से धान खरीद केंद्रों पर बासमती प्रजाति के धान की खरीद कराने की मांग की है।
विज्ञापन

खेकड़ा कृषि उत्पादन मंडी समिति सचिव जयप्रकाश धामा का कहना है कि तीन कृषि कानूनों के बाद से मंडी की आय लगभग शून्य है। यदि धान खरीद केंद्र पर बासमती धान के साथ जौ, ज्वार, मूंग और मसूर आदि की भी खरीदारी होने लगे तो डेढ़ प्रतिशत मंडी शुल्क के रूप में मंडी की आय बढ़ेगी। साथ में किसानों को धान की बिक्री के लिए हरियाणा नहीं जाना पड़ेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें