बागपत में जब तक पुन: अवार्ड के लिए फाइल डीएम तक नहीं पहुंचेगी और मुआवजे का फिर से निर्धारण नहीं होगा, तब तक किसान एक्सप्रेस-वे से नहीं हटेंगे। किसान अधिग्रहीत भूमि से एक इंच भी अधिक भूमि एनएचएआई को नहीं देंगे। चाहे इसके लिए वर्षों तक धरना देना पड़े।
किसानों ने पेरीफेरल एक्सप्रेस -वे में गई भूमि के मुआवजे की मांग को लेकर सोमवार को कलक्ट्रेट में जमकर हंगामा किया। इसके बाद डीएम हृदय शंकर तिवारी ने एनएचएआई के अधिकारियों को बुलवाया और समस्या के समाधान के लिए सभागार में बैठक कराई। किसानों ने बताया नोएडा समेत अन्य जगह अवार्ड कई बार वापस होकर मुआवजे का निर्धारण हो चुका हैं, लेकिन बागपत में अधिकारी किसानों का उत्पीड़न कर रहे हैं। 11 गांवों में से अभी तक एक भी गांव की पूरी तरह पैमाइश नहीं कराई गई है।
कभी कहीं खूंटी लगा दी जाती है और कभी कहीं। किसान अधिगृहीत भूमि से एक इंच भी भूमि नहीं देंगे। किसानों और एनएचएआई के अधिकारियों की काफी देर तक नोकझोंक हुई। जिलाधिकारी ने कोर्ट से अवार्ड वापस दिलाने के लिए किसानों से प्रार्थना-पत्र देने के लिए कहा। उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों को भी प्रार्थना पत्र कोर्ट में दाखिल करने के निर्देश दिए।
उन्होंने अधिकारियों को किसानों, लेखपाल और पुलिस के साथ फिर से निशानदेही कराने और वीडियोग्राफी कराने के निर्देश दिए, लेकिन किसानों ने धरना खत्म करने से इंकार कर दिया। किसानों ने कहा कि जब तक फाइल डीएम तक नहीं पहुंचेगी और मुआवजे के पुनर्निर्धारण नहीं होगा, तब तक एक्सप्रेस-वे से किसान नहीं हटेंगे।
इस मौके पर पुलिस अधीक्षक रवि शंकर छवि, अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार मालपाणी, एएसपी अजीजुर्रहमान, एसडीएम मनोज कुमार, किसान प्रतिनिधि कृष्णपाल सिंह, जितेंद्र धामा, परविंद्र धामा, एनएचएआई के परियोजना निदेशक एके जैन, इलियास आदि मौजूद रहे।