बागपत। यूपी और हरियाणा को जोड़ने के लिए 42 साल पहले बनी सड़क में गई जमीन के मुआवजे की किसानों की आस अभी अधूरी है। अब मुआवजे की आस के साथ ही किसानों की सांस थमती जा रही है। पहले अफसरों ने बजट नहीं होने की बात कहकर मुआवजा नहीं दिया तो अब सर्किल रेट के चक्कर में पेंच फंसा हुआ है।
हरियाणा से यूपी को जोड़ने के लिए वर्ष 1984 में सड़क का निर्माण किया गया। निवाड़ा के 12 और गौरीपुर के 20 किसानों की 90 बीघा जमीन पर इसका निर्माण हुआ था। तब किसानों को पक्की सड़क मिलने की खुशी थी और बागपत की जगह मेरठ जिला था। किसानों ने मुआवजे को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।
वर्ष 2008 में निवाड़ा के किसानों हाजी सत्तार, तुंगल अली, और गौरीपुर के पूरन आदि ने हाईकोर्ट में जमीन के मुआवजे के लिए केस डाला। हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में 850 रुपये वर्ग मीटर के हिसाब से मुआवजा देने के आदेश दिए। तब शासन से मुआवजा देने के लिए बजट नहीं मिला तो मामला लंबा खिंचता चला गया।
किसान लगातार अधिकारियों के पास मुआवजे की मांग को लेकर चक्कर काटते रहे। इसके बावजूद मुआवजा नहीं मिला। मुआवजे की आस में हाजी सत्तार, तुंगल अली, पूरन, हाजी आसे, मौसम, मौज्जम समेत 15 किसानों की मौत हो चुकी है। अब इनके बेटे मुआवजा लेने के लिए पैरवी कर रहे हैं, मगर मुआवजा अभी तक नहीं मिल सका।
विवाद बढ़ने पर मुआवजा आया तो सर्किल रेट का पेंच फंसा
वर्ष 2020 में मेरठ से सोनीपत तक के मार्ग को नेशनल हाईवे 334बी घोषित किया गया और यह सड़क एनएचएआई के अधीन हो गई। एनएचएआई के अधिकारियों ने कागजों में देखा तो उस जमीन के अधिग्रहण से संबंधित कोई फाइल नहीं मिली क्योंकि इस जमीन का अधिग्रहण नहीं किया गया था और बिना कागजी कार्रवाई के सड़क बना दी गई थी।
तब किसानों से संपर्क किया गया तो उन्होंने वर्तमान सर्किल रेट के आधार पर मुआवजे की मांग शुरू कर दी। उसके बाद भी मामला खिंचता गया और पांच साल तक कुछ नहीं हुआ। शासन ने मार्च 2025 में 5.20 करोड़ रुपये मुआवजा मंजूर करके 1.97 करोड़ रुपये जारी कर दिए। किसानों ने बढ़े सर्किल रेट से मुआवजा मांगा तो यह रुपये भी वापस चले गए।
हमारी एक बीघा जमीन पर सड़क बनी थी। पहले मेरे पिता हाजी सत्तार मुआवजे के लिए पैरवी कर रहे थे। उनका वर्ष 2017 में निधन हो गया। अब मैं मुआवजे के लिए पैरवी कर रहा हूं। -हसरत, निवाड़ा
जब यह सड़क बनी थी तो एक बीघा जमीन हमारी गई थी। मुआवजे के लिए 18 साल तक मेरे पिता तुंगल अली ने पैरवी की। उनकी छह महीने मौत हो गई। अब पूरे मामले को मैं देख रहा हूं।
-गुलजार, निवाड़ा
वर्जन
किसानों को पिछले साल मुआवजा दिया जा रहा था, मगर वे वर्तमान सर्किल रेट से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर ही किसान हाईकोर्ट में गए थे, जहां वे केस जीत गए। अब विभाग ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कराई है।
-अतुल कुमार, एक्सईएन लोक निर्माण विभाग