रटौल। दिल्ली के भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र से आये कृषि वैज्ञानिकों की टीम ने लहचौड़ा और रटौल में धान की फसल देखने के बाद किसानों को बीमारियों तथा कीटों से बचाने के उपाय बताए। वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी कि धान की फसल में मत्स्य पालन कर दोहरा लाभ उठाएं।
मंगलवार को भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र दिल्ली के वैज्ञानिक डॉ. परलाई भौमी, डॉ. सत्यप्रिय, प्रधान वैज्ञानिक डॉ. संजय सिंह राठौर तथा डॉ. सत्यप्रकाश ने लहचौड़ा और रटौल में धान की खेती देखी। किसानों ने भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र दिल्ली से बीज लाकर इस बासमती धान की बुआई की हुई है। वैज्ञानिकों ने किसानों को समझाया कि रोपाई के बजाय धान की सीधी बुआई करने से उत्पादन अच्छा होता है और पानी की भी काफी बचत होती है। धान की फसल को रोग तथा कीटों से कीटनाशकों का उपयोग के साथ बचाव का पूरा तरीका बताया। धान फसल में ज्यादा पानी भरने से उसमें धान के साथ मत्स्य पालन भी कर सकते हैं। इससे किसानों को दोहरा लाभ होगा। लहचौड़ा के दीपक शर्मा और विनोद शर्मा के धान फसल के रोगग्रसत कुछ पौधों को ले गए जिससे उन पर रिसर्च कर सकें। किसान राजकुमार यादव, विनोद शर्मा, हरिमोहन प्रधान, मास्टर चन्द्रबोष व बालेश्वर आदि मौजूद रहे।