बागपत के दोघट थाना क्षेत्र के गांव भड़ल में एक किसान ने सोमवार की शाम तमंचे से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। कैंसर पीड़ित मां का इलाज न कराने की विवशता, चीनी मिल से गन्ने का भुगतान नहीं होना, लोगों का बढ़ते कर्ज का दबाव सहन नहीं कर पाने पर किसान ने यह कदम उठाया। उसकी मौत से परिवार में कोहराम मचा है। रात तक पुलिस को सूचना नहीं दी गई थी।
ग्राम भड़ल निवासी चांदवीर (50) पुत्र बुद्ध सिंह की मां चंद्रो कैंसर की बीमारी से पीड़ित है। जिसके इलाज में काफी पैसे खर्च हो गए और वह लोगों का कर्जदार हो गया है। उसका खतौली मिल पर लाखों रुपये गन्ना भुगतान का बकाया है। उसने मिल में कई बार प्रार्थना पत्र दिए, लेकिन भुगतान नहीं हो सका।
मां की बीमारी में वह लोगों का कर्जदार हो गया है। अब लोग उस पर कर्ज लिए गए पैसे को लौटाने का दबाव बना रहे थे। इसमें समर्थ न होने से वह तनाव में रहने लगा था। हाल में ही उसके बड़े बेटे अंकित उर्फ बिट्टू की यूपी पुलिस में भर्ती हुई थी और वह मेरठ जनपद में तैनात है। छोटा बेटा राहुल भर्ती की तैयारी कर रहा है। उसकी पढ़ाई लिखाई पर भी काफी खर्च हो गया। इसी से परेशान चांदवीर का धैर्य जवाब दे गया और सोमवार की शाम उसने तमंचे से अपने पेट में गोली मार ली।
गोली की आवाज सुनकर परिजन जब उसके कमरे में गए तो वह लहूलुहान जमीन पड़ा था। गंभीर हालत में परिजन उसे लेकर बड़ौत में एक निजी अस्पताल पहुंचे, जहां से उसे मेरठ रेफर कर दिया गया। मेरठ ले जाते वक्त रास्ते में ही उसने दम तोड़ दिया। उसकी मौत की सूचना पर परिवार में कोहराम मच गया। उसकी पत्नी कौशल और छोटे बेटे राहुल का रोते बुरा हाल था। इस संबंध में अभी तक थाने पर तहरीर नहीं दी गई है। दोघट थाना प्रभारी सुनील कुमार शर्मा का कहना है कि जानकारी मिली थी, पुलिस टीम भेजी गई है। परिजनों के मेरठ में होने के कारण अभी तक जानकारी नहीं मिली है।
मिलों की मनमानी, किसानों पर भारी
बागपत। मिलें किसानों के गन्ने का बकाया देने को तैयार नहीं हैं। मलकपुर शुगर मिल ही पर किसानों का पिछले सत्र का लगभग सवा सौ करोड़ रुपये का बकाया है। इस सीजन का भी डेढ़ सौ करोड़ रुपये से अधिक का बकाया हो चुका है, लेकिन मिल ने अभी तक एक चवन्नी भी किसानों को नहीं दी है। यहीं हाल अन्य चीनी मिलों का भी है, जिन पर किसानों करोड़ों रुपया बकाया है।
बच्चों की फीस तक नहीं भर पा रहा है किसान। बेटियों की शादी टालनी पड़ रही है। साहूकार से कर्ज ले-लेकर कर्ज के बोझ तले दब चुके किसान मुफलिसी में मौत को गले लगाने को मजबूर हो गए हैं। भड़ल के चांदवीर भी कर्ज के दबाव को सहन नहीं कर पाया और जान देने पर मजबूर हो गया। सिर्फ चांदवीर ही नहीं पिछले पेराई सत्र के दौरान 5 किसानों ने मुफलिसी से तंग आकर अपनी जान दे दी थी। जैसे ही उन्होंने जान दी, उनका गन्ने का बकाया तुरंत मिल गया।
आखिर किसानों को कब तक अपनी जान देनी पड़ेगी और कब तक मिलें किसानों की खून पसीने की कमाई पर कुंडली मारे बैठी रहेंगी। जिला गन्ना अधिकारी सुशील कुमार का कहना है कि मिलों पर भुगतान के लिए पूरा दबाव है। इसी दबाव के चलते किसानों का पिछला काफी पैसा मिल गया है। इस वर्ष का मलकपुर शुगर मिल एवं दूसरे जनपदों की कुछ मिलों ने अभी पैसा नहीं दिया है। इसके लिए पूरे प्रयास किए जा रहे हैं।