बागपत में श्री चंद्र प्रभु मंदिर में चल रहे पंचकल्याण पर्व का बृहस्पतिवार को भगवान की प्रतिमाओं का श्री मंदिर में स्थापित करने के साथ ही समापन हो गया। विहर्ष सागर महाराज के सानिध्य में मंगल कलश को बोली दाता विनीत जैन और पुनीत जैन के आवास पर स्थापित किया गया।
समारोह के अंतिम दिन विहर्ष सागर महाराज ने प्रवचन करते हुए श्रद्धालुओं को भगवान के माध्यम से मोक्ष प्राप्त करने का रहस्य समझाया। ज्ञान की पूजा एवं मोक्ष कल्याण की विधी समझायी गई। कहा कि जन्म मरण का खात्मा तो केवल मुनियों की दीक्षा लेकर, तप कर एवं ज्ञान प्राप्त करके ही किया जा सकता है।
हालांकि शास्त्रों के अनुसार पंचम काल में मोक्ष प्राप्त नहीं किया जा सकता। इस मौके पर नगर में एक शोभायात्रा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु नाचते एवं गीत गाते चल रहे थे। स्वर्ण रथ सभी के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। यात्रा के उपरांत पूजन कर भगवान आदिनाथ की प्रतिमा को दिगंबर जैन मंदिर में विराजमान किया गया। इससे पूर्व ग्वालियर से आए प्रतिष्ठाचार्य अजित शास्त्री, सतीश शास्त्री के निर्देेशन में जाप अनुष्ठान में 21 हजार जाप किए गए।
इस दौरान समारोह के पदाधिकारियों, पात्रों, मंदिर के लिए जमीन प्रदान करने वाले परिवार हरिश्चंद जैन, पवन जैन, संजय जैन को सम्मानित किया गया। समिति के मीडिया प्रभारी राकेश मित्तल ने बताया कि जैन मुनि विहर्ष सागर महाराज शुक्रवार को पद विहार करते हुए जय शांति सागर निकेतन मंडोला पहुंचेंगे। जैन मुनि को 28 फरवरी से पूर्व मथुरा पहुंचना है, जहां पर जैन मुनि विहसंत सागर महाराज और जैन मुनि विजयेश सागर महाराज का चतुर्थ मुनि दीक्षा समारोह मनाया जाएगा।
29 फरवरी को विश्व की एक मात्र प्रतिमा जंबू स्वामी, मथुरा चौरासी का मुनि संघ के सानिध्य में 11 हजार कलशों से महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। शिखर चंद जैन, महामंत्री पंडित हंसराज जैन, संदीप जैन, प्रवीण जैन, बिन्नो, श्रीचंद गुप्ता, पंकज जैन, पीयूष, लवी, संजय रुहेला, नंदलाल डोगरा, आनंद, सुधीर सहित काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।