अधिकांश फल विक्रेता फलों पर स्टीकर लगा रहे है और फलों के सामान्य दाम के बावजूद ग्राहकों से 15 से 20 रुपये अधिक वसूल रहे है। खास बात यह भी है कि जो स्टीकर लगाए जा रहे है, वह सरकार द्वारा प्रमाणित भी नहीं है। न ही यह किसी कंपनी से मिला मार्का है। फलों पर स्टीकर लगा देख ज्यादातर लोग यही समझते है कि यह अच्छी गुणवत्ता का फल है।
शरीर के लिए हानिकारक होती है गोंद
सीएचसी अधीक्षक डा. विजय कुमार के अनुसार फलों पर स्टीकर लगा देख ग्राहक अच्छी क्लाविटी का समझते है। विक्रेता भी ग्राहक की इसी मानसिकता का फायदा उठाते है। फलों पर स्टीकर चिपकाने के लिए विक्रेता जिस गोंद का प्रयोग करते है, उसमें रसायन का प्रयोग किया जाता है। रसायन फलों में तेजी से घुल जाते है, जो शरीर के लिए हानिकारक हो सकता है।
गाजियाबाद में होती है फलों की टैगिंग
उद्यान विभाग के बड़ौत प्रभारी देवराज ने बताया कि फलों में गुणवत्ता की टैगिंग कराने के लिए गाजियाबाद में नेशनल सेंटर फॉर ऑगेेनिक फार्मिंग में आवदेन करना पड़ता है। यह सरकारी एजेंसी है। हालांकि इसमें आवदेन की प्रक्रिया जटिल जरूर है। लेकिन इसका टैग लगाने के बाद फल की सही जानकारी ग्राहक को मिलती है।
फलों पर स्टीकर लगाना नियम विरूद्ध है। यदि कोई फल विक्रेता स्टीकर लगाकर ग्राहकों को गुमराह कर फल ब्रिकी कर रहा है तो गलत है। क्योंकि स्टीकर को लगाने के लिए जिस गोंद का इस्तेमाल किया जाता है, वह शरीर के लिए हानिकार होती है। इसको लेकर छापामारी कर कार्रवाई की जाएगी। -मानवेन्द्र सिंह, सहायक खाद्य सुरक्षा अधिकारी बागपत