फिलहाल डिपो में 88 बसें निगम की व 59 बसें अनुबंधित संचालित है। यानी बसें भी बढ़ी और बसों के फेर यानी चक्कर भी बढ़ा दिएं। ताकि विभाग का राजस्व बढ़ सके और यात्री भी समय पर अपने गतंव्य तक पहुंच सके, लेकिन हैरानी की बात यह है कि रोडवेज का राजस्व बढ़ने की बजाए लगातार घटता जा रहा है। मात्र 15 दिनों के अंदर विभाग को 40 लाख का राजस्व नुकसान हो गया और अभी भी राजस्व लगातार कम होता जा रहा है। ऐसे में विभागीय अफसर चिंतित है।
6 हजार किमी प्रतिदिन अधिक चल रही बसें
बड़ौत डिपो में संचालित बसें पहले प्रतिदिन 38 हजार किमी दूरी का सफर तय करती थी, लेकिन अब 20 ओर अतिरिक्त बसों का संचालन होने से प्रतिदिन लगभग 44 हजार किमी दूरी का सफर करती है। यानी प्रतिदिन 6 हजार किमी बसें अधिक चल रही है, लेकिन इसके बावजूद भी यात्रियों की संख्या बढ़ने की बजाएं लगातार घट गई है। 25 फीसदी यात्रियों की संख्या घटने से प्रतिदिन रोडवेज को ढ़ाई से तीन लाख का राजस्व नुकसान पहुंच रहा है।