बागपत। डीजल-पेट्रोल के दामों में बढ़ोतरी से जिले के उद्यमियों की चिंता बढ़ गई है। पहले ही अमेरिका, इस्राइल और ईरान में युद्ध के कारण कच्चे माल के दाम दोगुने हो गए थे, जिससे उत्पादों की लागत बढ़ गई थी। अब परिवहन खर्च बढ़ने से उद्योगों पर और अधिक दबाव पड़ रहा है।
जिले में 200 से अधिक छोटी और बड़ी फैक्टरियां संचालित हैं। ये फैक्टरियां हैंडलूम, घरेलू साज-सज्जा, पैकेजिंग, प्लास्टिक उत्पाद और रिमोट तैयार करती हैं। इन उत्पादों के लिए कच्चा माल दूसरे देशों से मंगाया जाता है। तैयार उत्पाद देशभर और विदेशों में भेजे जाते हैं। युद्ध शुरू होने के बाद प्लास्टिक दाना, लोहे की शीट, सरिया, कागज और पॉलिथीन जैसे कच्चे माल के दाम दोगुने हो गए थे। इससे उत्पादों की लागत में भारी वृद्धि हुई। नतीजतन, खरीदारों ने कई ऑर्डर निरस्त कर दिए थे। अब डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से परिवहन लागत में भी इजाफा हो गया है। यह दोहरी मार उद्यमियों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है। इससे उत्पादन और वितरण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
-औद्योगिक क्षेत्र से पहले जिस सामान को भेजने में 2 हजार रुपये ट्रांसपोर्ट किराया लगता था, अब 2200 से 2300 रुपये हो गया है। वहीं कच्चा माल पहले से दोगुने दामों पर खरीदना पड़ रहा है। ऐसे में आमदनी बढ़ने के बजाय घट रही है।-प्रदीप गुप्ता, उद्यमी
-डीजल-पेट्रोल के दाम बढ़ने से ट्रांसपोर्ट भी महंगा हो गया है। बाजार में सामान भेजने के लिए पहले से ज्यादा किराया देना पड़ रहा है। कच्चा माल और डीजल-पेट्रोल के दाम कम होने पर स्थिति सामान्य होगी।- लोकेश कुमार, उद्यमी