बड़ौत। नगर पालिका परिषद ने शहर के दूषित पानी को साफ करने और उसके दोबारा उपयोग के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना शुरू की है। मीरापुर रजबहे पटरी पर चार डिसेंट्रलाइज्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (डीएसटीपी) स्थापित किए गए हैं। इस परियोजना पर करीब चार करोड़ रुपये की लागत आई है, जिससे रोजाना पांच लाख लीटर दूषित पानी का शोधन किया जाएगा।
इन प्लांटों का मुख्य उद्देश्य घरों से निकलने वाले दूषित पानी को उपचारित करना है। साफ किए गए पानी को रजबहे में छोड़ा जाएगा। इससे जल प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। अवर अभियंता शिखा दूबे ने बताया कि चार डीएसटीपी में से एक की क्षमता 50 केएलडी है। दो प्लांट सौ-सौ केएलडी क्षमता के हैं। चौथा प्लांट 250 केएलडी क्षमता का है। ये सभी प्लांट मिलकर प्रतिदिन कुल 500 केएलडी (पांच लाख लीटर) पानी को साफ करेंगे। मीरापुर रजबहे पर स्थापित तीन डीएसटीपी पहले ही चालू हो चुके हैं। चौथा प्लांट भी जल्द ही काम करना शुरू कर देगा।
भू-जल प्रदूषण पर नियंत्रण
इस परियोजना से भू-जल प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगेगी। दूषित पानी के सीधे जमीन में जाने से होने वाली समस्याओं का समाधान होगा। साफ पानी के उपयोग से शहर की जल संबंधी कई दिक्कतें खत्म होंगी। यह पहल शहर के निवासियों के लिए स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करेगी। यह पर्यावरण के लिए एक सकारात्मक कदम है।
वर्जन
प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए करीब चार करोड़ रुपये की लागत आई है। दूषित पानी साफ होने के बाद छिड़काव, निर्माण कार्यों व पार्कों में पेड़े-पौधों की सिंचाई के लिए उपयोग किया जा सकता है। -मनाेज कुमार रस्तोगी, अधिशासी अधिकारी नगर पालिका