बड़ौत। उम्र 32 भी नहीं हुई, लेकिन रक्तदान का महत्व मानों बचपन से जान लिया। अब तक वे 61 बार रक्तदान कर चुके है। कहीं पर भी रक्त की जरूरत पड़ती है तो वे मसीहा बनकर वहां पर पहुंच जाते है। कभी दोस्तों के लिए, तो कभी अजनबियों के लिए। ब्लड की दरकार चाहे रात में पड़े तो या फिर दिन में। सूचना मिलते ही दौड़ पड़ते है। ऐसे मसीहा का नाम है डॉ. अमित गुप्ता।
वर्ष 2016 से बिनौली सीएचसी पर चिकित्सा अधिकारी के पद पर तैनात डॉ. अमित गुप्ता पुत्र हरिशंकर गुप्ता दिल्ली के रहने वाला है। उन्हें बचपन से ही गरीब परिवार के बच्चों को खिलौने व कपड़े देने का शौक था। एक बार उनके किसी दोस्त का एक्सीडेंट हो गया था। एक्सीडेंट के बाद उनके दोस्त को खून की जरूरत थी, लेकिन कई बड़े नामचीन अस्पतालों व चिकित्सकों के पास भी उनके दोस्त को खून नहीं मिला। तब उन्हें रक्तदान करने का महत्व का पता चला था। हालांकि बाद में उनके दोस्त को किसी परिचित ने खून देकर उनकी जान बचा ली थी, लेकिन डॉ. अमित गुप्ता ने 18 साल की उम्र में ही रक्तदान करने का संकल्प ले लिया था। उसके बाद न तो उन्होंने खुद तो रक्तदान किया, साथ ही दूसरे लोगों को भी तैयार किया। अब तक डॉ. गुप्ता 61 बार रक्तदान कर चुके है।
बड़े भाई से मिली रक्तदान करने की प्ररेणा
डॉ. गुप्ता बताते है कि बड़े भाई अरुण गुप्ता से उन्हें रक्तदान करने की प्रेरणा ली। अरुण भी 50 बार रक्तदान कर चुके है। डॉ. अमित गुप्ता वर्ष 2011-2012 सशस्त्र सीमा बल हिमाचल प्रदेश के ट्रेनिंग सेंटर मेें चिकित्सा अधिकारी के पद पर थे, तभी भी उन्होंने अनेकों जवानों की रक्त देकर जान बचाई।
देश ही नहीं विदेशों मेें भी किया रक्तदान
डॉ. अमित गुप्ता के रक्तदान करने से प्रेरणा लेकर मथुरा निवासी डॉ. पुष्पेन्द्र कुमार, दिल्ली निवासी प्रीति कुमारी, हिमाचल प्रदेश निवासी जितेंद्र कुमार, सीएचसी बिनौली पर तैनात वार्ड ब्वॉय अजित धामा सहित सैकड़ों लोग आज लोगों को रक्तदान करने के लिए जागरूक कर रहे है। सभी स्वयं भी जरूरतमंदों के लिए रक्तदान करते है। डॉ. अमित गुप्ता ने वर्ष 2016 में फ्रांस, 2017 में मास्को मेें भी रक्तदान किया था।