बिनौली। बरनावा के श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में चल रहे 41 दिवसीय शांति विधान में बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव के साथ पूजा-अर्चना करते हुए भगवान चंद्रप्रभु को श्रीफल समर्पित किए।
विधान में पंडित जयकुमार जैन ने कहा कि यह भव समुद्र अपार तारण के हित सुविधि है, अर्थात यह संसार रूपी समुद्र अपार है। इसका कोई छोर और किनारा आज तक महापुरुषों के ज्ञान में भी नहीं आया। ऐसे महासमुद्र को पार करने के लिए श्री 1008 चंद्रप्रभु भगवान खेवटिया नाव के समान है, जो खेवटिया नाव में बैठाकर नाव को उस पार लगा देता है, ऐसे ही भगवान के चरणों में भगवान के चरण रूपी नाव में बैठकर जाने पर भगवान खेवटिया के सदृश चरणों में बैठने वाले को उस पार पहुंचा देती है। विधान में ललित जैन, हिमांशु जैन, संजय जैन, राजेंद्र जैन आदि ने भाग लिया।