बागपत, बड़ौत। एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए चार केसों का फेर मरीजों के लिए मुसीबत बन रहा है। इसके चक्कर में मरीजों को जेब अधिक ढीली करनी पड़ रही है।
कुत्तों के काटने पर एंटी रैबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। यह इंजेक्शन जिले की सभी सीएचसी व जिला अस्पताल में मौजूद है, लेकिन सीएचसी समेत ग्रामीण इलाके में स्थित सीएचस में यह इंजेक्शन लगवाना मरीजों के लिए मुसीबत बन रहा है। कारण यह है एक वॉयल में पांच डोज होती है। एक बार वॉयल खोलने के बाद पांच लोगों को करीब दो घंटे के अंदर इंजेक्शन लग जानी चाहिए, लेकिन जब मरीज सीएचसी पर पहुंचते हैं तो उन्हें अन्य चार लोगों का इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में मरीजों के सामने प्राइवेट क्लीनिक में इंजेक्शन लगवाने का विकल्प बचता है। इसके लिए उन्हें अपनी जेब बहुत ढीली करनी पड़ रही है।
बुधवार को सीएचसी पर पहुंचे नेहरू रोड निवासी प्रियांशु इंजेक्शन लगवाने के लिए पहुंचा, तो से बृहस्पतिवार को आने के लिए कह दिया गया। इसके अलावा नगर की बिजरौल रोड निवासी सोनू को भी चार लोग न होने पर अगले दिन सुबह 10 से 11 बजे के बीच आने के लिए कहते हुए वापस कर दिया गया। उधर बुधवार को खेकड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 42 लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए। वहीं अग्रवाल मंडी टटीरी कस्बे में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच को इंजेक्शन लगाए।
- दो हजार तक हो जाते हैं खर्च
एंटी रेबीज का इंजेक्शन सरकारी अस्पतालों में बिना किसी शुल्क के लगाया जाता है। वहीं प्राइवेट क्लीनिक में एक इंजेक्शन करीब चार सौ रुपये का पड़ता है। चिकित्सकों का कहना है एक मरीज को पांच इंजेक्शन लगवाने पड़ते हैं। एक इंजेक्शन चार सौ का मिलता है तो उसे पूरा कोर्स पूरा करने के लिए करीब दो हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
वर्जन- डाॅग बाइट घाव को किसी अच्छे एंटीबायोटिक साबुन से अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। कुछ देर बाद टिटनेस का टीका अवश्य लगवा लेना चाहिए।
बहुत जरूरी होता है। कुछ लोग लगवाने में बहुत देरी कर देते हैं। यह लापरवाही ठीक नहीं होती है। सभी सरकारी अस्पतालों में यह निशुल्क उपलब्ध है। -डॉ. विजय कुमार सीएचसी अधीक्षक बड़ौत।