बागपत में बुखार ने कहर बरपा दिया है। दो दिन के अंदर एडीएम के पेशकार राजीव की पत्नी नम्रता देवी और खट्टा प्रह्लादपुर गांव में कक्षा पांच के छात्र निशांत कुमार की मौत हो गई। जबकि जिला अस्पताल में बुखार के मरीजों की भीड़ लगी हुई है। शायद ही कोई गांव हो, जहां पर लोग बुखार से ग्रस्त न हो। इसके बावजूद गांवों में न तो स्वास्थ्य कैंप लगाए जा रहे हैं और न ही कीटनाशक दवाई का छिड़काव हो रहा है।
बहुउद्देश्यीय क्रीड़ा हाल के समीप सरकारी आवास में रहने वाले राजीव कुमार ने बताया कि उनकी पत्नी नम्रता देवी, तीन-चार दिन से बुखार से ग्रस्त थी। उन्होंने पहले नम्रता का बागपत शहर के निजी अस्पताल में उपचार कराया। अब जिला अस्पताल से उपचार चल रहा था। वे घर से ही उपचार करा रहे थे। रविवार को उनकी अचानक हालत बिगड़ गई। उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उनके दो वर्ष की बेटी है। घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
इसके अलावा खट्टा प्रह्लादपुर निवासी राजेश कुमार का बेटा निशांत कुमार (12), गांव के ही सरस्वती शिक्षा निकेतन में पढ़ता था। ग्राम प्रधान मनोज कुमार का कहना है कि निशांत, चार दिन से बुखार से ग्रस्त था। परिजन उसका निजी अस्पताल में उपचार करा रहे थे। सोमवार तड़के करीब तीन बजे उसकी अचानक हालत बिगड़ गई। परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां पर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। ग्राम प्रधान का कहना है कि गांव में बड़ी संख्या में लोग बुखार से ग्रस्त है। उन्होंने गांव में मरीजों के उपचार करने और कीटनाशक दवाई का छिड़काव कराने की मांग की है।
सरूरपुर में हो चुकी है बुखार से मौत
बागपत। सरूरपुर गांव में पांच दिन पूर्व बच्चे की बुखार से मौत हो चुकी है। अभी भी गांव में काफी लोग बुखार से ग्रस्त है। लोगों ने मरीजों के उपचार कराने की मांग की है।
कैंप में 171 मरीज आए
बागपत। पिलाना सीएचसी अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह का कहना है कि खट्टा प्रह्लादपुर में स्वास्थ्य कैंप लगाकर 171 मरीजों का उपचार किया गया है। उनका कहना है कि बुखार के 8-10 मरीज ही मिले हैं।
ऐसे अस्पताल न हो तो अच्छा है
बागपत। एडीएम के पेशकार राजीव कुमार का कहना है कि ऐसे सरकारी अस्पतालों का तो न होना ही अच्छा है। क्योकि लोग अपने मरीज को दूसरी जगह तो ले जाएंगे, जिससे उनकी जान तो बच जाएंगे।
जिला अस्पताल में रोज 450 बुखार के मरीज
बागपत। जिला अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ है। दिन निकलते ही अस्पताल में मरीज की लाइन लग जाती है। आलम यह है कि मरीजों की पर्ची भी नहीं बच पाती है। मजबूर होकर अनेकों मरीजों को दूसरे अस्पतालों में जाना पड़ता है। अस्पताल के वार्ड बुखार से पीड़ित मरीजों से भरे हुए है। सोमवार को जोनी सिसाना, ब्रहमपाल हसनपुर मसूरी, जमील निवाड़ा, मांगो गौरीपुर, सोनिया अग्रवाल मंडी टटीरी, वसीम रटौल, गय्यूर माता कालोनी बागपत, फिरदौस बागपत, अमरेश सरूरपुर, रामफल निरोजपुर, अफसाना निवाड़ा, सीमा निवाड़ा, शांति छपरौली, तसलीम देशराज मोहल्ला बागपत, शाबू निवाड़ा, मुस्कान पुराना कस्बा बागपत, सोनम टटीरी, जनक संतोषपुर, शिवानी टटीरी, मनोज नंगला बहलोलपुर अस्पताल में भर्ती है। सीएमएस कलां निधि सारस्वत का कहना है कि अस्पताल में प्रतिदिन 1000-1100 मरीज आ रहे है। इनमें से करीब 425-450 मरीज बुखार से ग्रस्त होते है।
फर्श पर लेट रहे मरीज
बागपत। जिला अस्पताल में मरीजों को बैड भी उपलब्ध नहीं हो रहे है। मरीज सीट और जमीन पर लेटे हुए है। इससे मरीजों में रोष व्याप्त है।
किसकी बात पर करें यकीन
सीएमओ डॉ. रविंद्र कुमार मिश्रा का कहना है कि पिलाना क्षेत्र में बुखार का प्रकोप होने की जानकारी मिली है। जिले में ज्यादा लोग बुखार से ग्रस्त नहीं है। एडीएम के पेशकार की पत्नी की बुखार से मौत होने की उन्हें जानकारी नहीं है। उधर, सीएमएस कला निधि सारस्वत का कहना है कि जनपद में बुखार का प्रकोप हो रहा है। प्रतिदिन अस्पताल में काफी बुखार के मरीज आ रहे हैं।