गर्भवती पत्नी को रिक्शे से लेकर पीएचसी पहुंचा पति
- फोटो : अमर उजाला
शेखपुरी मोहल्ला निवासी शादाब ने बताया कि उसकी पत्नी फरीन गर्भवती थी और शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे उसे प्रसव पीड़ा होने पर एंबुलेंस को फोन किया। पहले काफी देर तक फोन नहीं उठाया गया और फोन उठाने पर 20 मिनट बाद तक भी एंबुलेंस उनके घर पर नहीं पहुंची। गर्भवती फरीन दर्द से तड़पती रही और जब एंबुलेंस नहीं पहुंची तो आशा कार्यकर्ता को सूचना दी।
इस बीच ही गर्भवती ने घर पर ही बेटे को जन्म दिया। बाद में परिजन रिक्शा में प्रसूता व बच्चे को लेकर कस्बे के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे और दोनों को वहां भर्ती कराया गया।
वहां दोनों का उपचार शुरू कराया गया और दोनों सुरक्षित हैं। शादाब ने कहा कि कस्बे में एंबुलेंस समय से नहीं पहुंचती है और इससे काफी परेशानी होती है। उन्होंने मामले में सीएमओ से शिकायत करने की बात कही है, जिससे एंबुलेंस सेवा में सुधार हो सके।
गर्भवती पत्नी को रिक्शे से लेकर पीएचसी पहुंचा पति
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एंबुलेंस नहीं आने से लोगों को होती है परेशानी
एंबुलेंस के समय से नहीं पहुंचने का यह कोई पहला मामला नहीं है। बिनौली सीएचसी में भर्ती एक व्यक्ति को जिला अस्पताल ले जाने के लिए एंबुलेंस को फोन किया था, लेकिन वह काफी देर तक नहीं पहुंची थी। इसके बाद परिजन निजी वाहन से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे थे। इसके अलावा जिला अस्पताल में भी कई बार लोग एंबुलेंस के समय पर नहीं आने को लेकर हंगामा कर चुके हैं।
रटौल कस्बे से जब फोन आया तो एंबुलेंस को खेकड़ा से तुरंत रवाना कर दिया था। जब एंबुलेंस जा रही थी तो वह रेलवे फाटक बंद होने के कारण वहां फंस गई। जब वहां से निकलकर एंबुलेंस जा रही थी तो शादाब ने फोन कर एंबुलेंस नहीं भेजने की बात कह दी। एंबुलेंस चालक ने काफी समझाया, लेकिन नहीं माने। चालक ने बाद में इसकी जानकारी मुख्यालय को दी। एंबुलेंस पहुंचने में 10 से 15 मिनट लगती है। -राजेश रंजन, 102 एंबुलेंस प्रभारी