कांवड़ यात्रा 2026, जिम थीम कांवड़
- फोटो : अमर उजाला
रास्ते में युवाओं से करवा रहे पुश-अप और स्क्वाट
अमित और उनकी टीम यात्रा के दौरान विभिन्न स्थानों पर रुककर युवाओं को पुश-अप, स्क्वाट और अन्य सरल व्यायाम कराती है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले युवाओं को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित भी किया जाता है। उनके साथ यात्रा कर रहे दो नन्हे शिवभक्त भी लगातार व्यायाम कर लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
मिनी जिम जैसी कांवड़ बनी आकर्षण
करीब 250 किलोमीटर लंबी यात्रा में अमित अब तक लगभग 145 किलोमीटर का सफर पूरा कर चुके हैं। उनकी कांवड़ को मिनी जिम का रूप दिया गया है। आगे भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित है, जबकि पीछे डंबल और अन्य जिम उपकरण लगाए गए हैं। सबसे खास बात यह है कि अमित इस भारी कांवड़ को मोटी लोहे की चेन से बांधकर नंदी की तरह खींचते हुए यात्रा कर रहे हैं, जो श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
कांवड़ यात्रा 2026, जिम थीम कांवड़
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'नशा नहीं, फिटनेस का जुनून अपनाइए'
अमित का कहना है कि आज बड़ी संख्या में युवा नशे की लत के कारण अपना भविष्य और स्वास्थ्य दोनों खो रहे हैं। इसी वजह से उन्होंने कांवड़ यात्रा के माध्यम से फिटनेस का संदेश देने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि शरीर को मंदिर की तरह स्वस्थ रखना चाहिए। यदि किसी चीज का जुनून अपनाना है तो वह फिटनेस का होना चाहिए, न कि नशे का।
कांवड़ यात्रा 2026, जिम थीम कांवड़
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राष्ट्रीय स्तर के तैराक भी रह चुके हैं अमित
40 वर्षीय अमित दिल्ली पुलिस में हेड कांस्टेबल हैं और राष्ट्रीय स्तर के तैराक भी रह चुके हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कभी किसी प्रकार का नशा नहीं किया। पुलिस सेवा के दौरान उन्होंने कई युवाओं को नशे की वजह से बर्बाद होते देखा, जिसके बाद उन्होंने समाज में फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
उन्होंने कांवड़ियों से अपील की कि बिना शारीरिक तैयारी के भारी कांवड़ न उठाएं। नियमित व्यायाम के बाद अपनी क्षमता के अनुसार ही यात्रा करें। उनके अनुसार कांवड़ यात्रा केवल आस्था नहीं, बल्कि अनुशासन, संयम और शारीरिक क्षमता की भी परीक्षा है। इस अभियान में सोनू पहलवान, चिंटू राठी और गोलू राठी भी उनका सहयोग कर रहे हैं।