सावन के दूसरे सोमवार को खेकड़ा के शिवालय मे भगवान शिव की पूजा अर्चना करते श्रद्वालु
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खेकड़ा (बागपत)। कस्बे के मोहल्ला औरंगाबाद, चक्रसेनपुर स्थित प्राचीन शिव मंदिर की बहुत मान्यता है। यहां मांगी मुरादें सदैव पूर्ण होती हैं। इसके चलते ससुराल से लौटकर बेटियां यहां मन्नतें मांगती हैं।
औरंगाबाद, चक्रसेनपुर दो मोहल्लों के बीच स्थित प्राचीन शिव मंदिर मठ का अपना इतिहास है। मंदिर के पंडित ब्रिजेश शास्त्री ने बताया कि मंदिर में शिवलिंग पर दूध चढ़ाकर प्रांगण स्थित बरगद के पेड़ की पूजा कर धागा बांध जाता है। इससे भगवान आशुतोष मुरादें को पूरी करते हैं। कुछ वर्ष पूर्व यहां नाग-नागिन के जोड़े ने दर्शन दिए थे। तब भक्तों ने उनकी पूजा भी की थी। मंदिर की मान्यता का इससे चलता है कि प्रतिवर्ष अगस्त में होने वाले धार्मिक कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ससुराल से आकर नगर की बेटियां यहां पूजा-अर्चना कर मुरादें मांगती हैं। भगवान शिव सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण कर उनका कल्याण करते हैं। सावन के दूसरे सोमवार की सुबह पांच बजे से ही नगर क्षेत्र के शिवालयों में भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के लिए महिला, पुरुष श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। आज यहां श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ कमाया।