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जिले में 15 स्थानों पर होगा रावण के पुतलों का दहन

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बागपत के दिल्ली रोड स्थित मैदान में तैयार हुए रावण, मेघनाथ और कुंभकरण के पुतलें - फोटो : BAGHPAT
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जिले में 15 स्थानों पर होगा रावण के पुतलों का दहन
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बागपत। जिले में दशहरा मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पुलिस-प्रशासन ने इस संबंध तैयारी कर ली है। जिला बागपत में 15 जगह रावण के पुतलों का दहन होगा। रामलीला स्थलों से मनमोहक झांकियां निकाली जाएगी। सुरक्षा की दृष्टि से भारी पुलिस फोर्स तैनात रहेगा।
जिले के लोगों ने विजयादशमी की सभी तैयारी पूरी कर ली है। कहीं रावण के पुतले को खुद तैयार किया जा रहा है तो कहीं दिल्ली से पुतले मंगवाए गए हैं। रावण दहन के दौरान जनपद में कई जगहों पर मेले का आयोजन होगा और रामलीला स्थलों से मनमोहक झांकियां भी निकाली जाएंगी। रावण दहन को लेकर लोगों में भी भारी उत्साह देखा जा रहा है। रावण दहन के मौके पर लोगों को किसी अनहोनी से बचाने के लिए जिला प्रशासन ने भी पुख्ता इंतजाम किए हैं। इस दौरान दमकल विभाग भी सतर्क रहेगा। दमकल विभाग के कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी। जनपद बागपत में 15 स्थलों पर रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण के पुतलों का दहन होगा। श्री बागेश्वर आदर्श रामलीला कमेटी के अध्यक्ष यशवीर चौहान ने बताया कि इस बार दिल्ली से पुतले मंगाए जा रहे हैं। दिल्ली-सहारनपुर रोड पर मैदान में रावण के पुतले का दहन होगा। मंगलवार को पुतले खड़े किए जाएंगे। दशहरा पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस फोर्स तैनात रहेगी। पुलिस कर्मियों की ड्यूटी लगा दी। एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव ने बताया कि पुतला दहन के समय भीड़ बढ़ जाती है। कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए अतिरिक्त फोर्स लगाई। पुतले से एक सौ मीटर लोगों को खड़ा किया जाएगा।
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इन स्थानों पर होगा रावण के पुतले का दहन
बागपत। रावण के पुतले का दहन बागपत, अग्रवाल मंडी टटीरी, मीतली, अहमद शाहपुर पदड़ा, गठिना, नैथला, बड़ौत में दिगंबर जैन कॉलेज के सी फील्ड, खेकड़ा में काठा रोड पर सीएचसी के पास, रटौल, चांदीनगर में ललियाना-मंसूरी मार्ग पर, अमीनगर सराय, नंगला रवां, तितरौदा, बिनौली आदि स्थलों पर होगा।
बड़ागांव में नहीं जलाया जाएगा रावण
खेकड़ा। एक गांव जो श्रीराम को भी मानता है और रावण का भी सम्मान करता है। ऐसा गांव जहां लंकेश का पुतला दहन नहीं किया जाता है। जहां के लोग कहते हैं कि रावण आए तो गांव में मंशा देवी का मंदिर बन गया। यही वजह है कि बड़ागांव को यहां के लोग रावण भी कहते हैं। रावण उर्फ बड़ागांव में रावण का पुतला दहन नहीं किया जाता। सदियां बीत गई, लेकिन इस तक गांव में रामलीला नहीं हुई। गांव में रावण के पुतले का दहन नहीं करने की परंपरा है। ग्रामीण दशहरा पर रावण की भी पूजा करते हैं। गांव में जैन मंदिर और मंशा देवी मंदिर की वजह से यहां दूरदराज से श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है।
क्या कहते हैं ग्रामीण
सुरेश कुमार का कहना है कि रावण में लाख बुराइयां थी, लेकिन उनके नाम से गांव को पहचान मिली। गांव में रावण की मूर्ति स्थापित करने का विचार है। इस पर जल्द ही ग्रामीणों की बैठक बुलाई जाएगी।
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रामपाल त्यागी और उमेश त्यागी कहते है कि गांव में रावण कुंड के नाम से भी तालाब है। इसका जीर्णोद्धार कराने का प्रयास किया जा रहा है। ग्राम प्रधान अपने स्तर से इसके जीर्णोद्धार के प्रयास में लगे हैं।
हरिओम त्यागी का कहना है कि ग्रामीण दशहरा पर रावण के पुतले का दहन नहीं करते हैं, बल्कि उनकी पूजा की करते हैं। यह परंपरा हजारों साल से चली आ रही है।
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