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कोरोना संक्रमण काल में दूध उत्पादकों पर संकट

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बागपत। कोरोना संक्रमण काल में दूध उत्पादकों को भी संकट का सामना करना पड़ रहा है। मिठाई की दुकानें, रेस्टोरेंट व ढाबे बंद होने से दूध की खपत कम हो गई। जिससे बिक्री भी घट गई है। इसके साथ ही चारे के दामों में वृद्धि होने से दूध उत्पादकों पर दोहरी मार पड़ी है। कई दूध उत्पादकों को नुकसान होने पर मवेशी तक बेचने पड़े हैं। अब हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे हैं। कोरोना कर्फ्यू की पाबंदियां हटने से यह कारोबार पटरी पर आने की उम्मीद जगी है।
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केस-1
ग्राम निबाली निवासी श्रवण गुर्जर दूध कारोबारी हैं। भजन विहार में उनकी दूध की डेयरी है। कोरोना संक्रमण से पहले उनकी डेयरी में 25 भैंसें थीं। संक्रमण बढ़ने पर कोरोना कर्फ्यू लगा तो मिठाई की दुकानें, रेस्टोरेंट और ढाबे आदि बंद हो गए। जिससे दूध की बिक्री घट गई। दूसरी ओर हरा चारा, खल व चोकर के दाम बढ़ गए। इससे डेयरी संचालकों को नुकसान होने लगा तो उन्होंने पांच भैंसें बेच दीं। पहले जहां उनका उत्पादन ढ़ाई हजार लीटर प्रतिमाह का था। वह अब घटकर दो हजार लीटर रह गया। कोरोना कर्फ्यू हटने के बाद भी हालात सामान्य होने में वक्त लगेगा।
केस-2
घड़ौली (गाजियाबाद) निवासी संतराम की कोर्ट रोड पर डेयरी है। कोरोना संक्रमण से पहले उनके पास 17 भैंस थीं। करीब 1700 लीटर प्रतिमाह दूध का उत्पादन होता था। आसपास क्षेत्र के लोगों के अतिरिक्त होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों पर दूध की सप्लाई होती थी। कोरोना कर्फ्यू लगा तो दूध की खपत कम हो गई। दूध बचने से नुकसान होने लगा। ऐसे में उन्हें मजबूरन चार भैंसें बेचनी पड़ीं। संतराम का कहना है कि कोरोना कर्फ्यू हटने से अब फिर से कारोबार पटरी पर आ सकता है।
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चारे के दाम पहले और अब
हरा चारा प्रति पांच किलो 10 रुपये 15 रुपये
पीली सरसों की खल प्रति बोरी 2000 रुपये 2400 रुपये
काली सरसों की खल प्रति बोरी 1500 रुपये 2000 रुपये
बिनौले की खल प्रति बोरी 1400 रुपये 1900 रुपये
चोकर प्रति बोरी 900 रुपये 1200 रुपये
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