शामली। जैसे-जैसे रोशनी का त्योहार दिवाली नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे कुम्हारों के चाक की रफ्तार तेज हो गई है। जनपद के गांव कुड़ाना में बन रहे दीये शामली के साथ हरियाणा के यमुनानगर क्षेत्र को भी जगमग करेंगे। हर घर को पारंपरिक तरीके से रोशन करने के लिए कुम्हार दिन-रात मिट्टी के दीये बनाने में जुटे हुए हैं।
गांव कुड़ाना में इस समय दिवाली की रौनक साफ दिखाई दे रही है। मिट्टी को गूंदकर, लोंदा बनाकर, फिर चाक पर उन्हें सुंदर दीयों का आकार दिया जा रहा है। ये सिर्फ दीये ही नहीं, बल्कि कुम्हारों की सदियों पुरानी कला और परंपरा का प्रतीक है। दीयों को धूप में सुखाने और फिर भट्टी में पकाने का काम जोरों पर है। चाक पर दीये तैयार कर रहे गांव कुड़ाना के राहुल ने बताया कि वह हर दिवाली पर लगभग छह लाख दीये तैयार करते हैं। इनमें से चार लाख दीये हर वर्ष हरियाणा के यमुनानगर में सप्लाई किए जाते हैं। यमुनानगर के दुकानदार पहले ही उन्हें दीयों का ऑडर दे देते हैं, जिसके चलते वह लगभग एक माह पहले ही कार्य में जुट जाते हैं। उनके साथ ही उनकी दो बहनें और माता भी उनका सहयोग कर रही हैं। वे यह कार्य पिछले 40 वर्षों से कर रहे हैं। पहले उनके पिता रुहला बनाते थे। उनके बाद अब वह बनाते हैं। वहीं दो लाख दीये गांव के साथ ही आसपास के जनपदों व गांव काबड़ौत, बहावड़ी, कुरमाली, आदमपुर, भाजू, लांक, बुटराड़ी, बरलाजट में सप्लाई किए जाते हैं।
-फिर बढ़ने लगी दीयों की मांग
गांव के दूसरे कुम्हार दीपक ने बताया कि बीच में कुछ वर्षों में चीनी झालरों और मोमबत्तियों की चकाचौंध के कारण मिट्टी के दीयों की मांग में कमी आ गई थी। इससे कुम्हारों की रोजी-रोटी पर संकट आ गया था। हालांकि अब लोग एक बार फिर से अपनी भारतीय परंपरा की ओर लौट रहे हैं। सरकार की ओर से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे मिट्टी के दीये फिर से बिकने लगे हैं, जिनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। उनके द्वारा बनाए गए दीये भी गांव के साथ ही शामली जनपद के अलग-अलग कस्बों में सप्लाई हो रहे हैं। कारोबार अच्छा रहने की उम्मीद है।
बाजार में ये है कीमत
सामग्रीदाम रुपये मे
छोटे दीये 1रूपये
बड़े दीये-पांच रुपये
गुल्लक40 रुपये
पूजा की थाली 25 रुपये
कुल्हड़-10 से 40 रुपये
मूर्तियां-20 से 150
गिलास-10 रुपये
मिट्टी के खिलौने50 रुपये