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करोड़ों खर्च, न पेयजल मिला, गलियां भी धंसने लगी

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बिजरौल गांव में पेयजल नाली लीक होने के कारण धसा खंडजा - फोटो : BAGHPAT
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- पहले चरण में 80 गांवों में करीब 160 करोड़ से बिछवाई थी लाइन, अब दूसरे चरण में 84 गांवों में 190 करोड़ से चल रहा काम
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- गांवों में पेयजल लाइन बिछाते ही टूटने लगी तो उससे पानी लीक होने पर खड़ंजे भी धंसने लगे
- बिजरौल, बिलौचपुरा समेत कई गांवों में स्थिति खराब, लोगों को पानी के लिए हैंडपंप का सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत/अमीनगर सराय। जिले के गांवों में पेयजल के लिए करोड़ों रुपये भले ही खर्च किए जा रहे है। पहले चरण में 80 गांवों में पेयजल लाइन बिछवाई गई थी, अब 84 में काम चल रहा है। मगर, हालात ऐसे है कि पेयजल भी नहीं मिल रहा है और सड़के धंसने से परेशानी ज्यादा बढ़ गई है। पहले चरण में बिछवाई गई पेयजल लाइनों वाले अधिकतर गांवों में कुछ ऐेसे ही स्थिति बनी हुई है। लोगों को अब भी पानी के लिए हैंडपंप का सहारा लेना पड़ रहा है।
सरकार ने पानी की समस्या को देखते हुए हर गांव में ओवरहेड टैंक के सहारे घरों तक पेयजल आपूर्ति कराने की योजना बनाई थी। इसकी जिम्मेदारी जल निगम को सौंपी गई थी। इस योजना के तहत पहले चरण में 80 गांव में करीब 160 करोड़ रुपये से पेयजल लाइन बिछवाने के साथ ही टंकी का निर्माण कराया गया था। इन 80 गांवों में पेयजल आपूर्ति शुरू कर दी गई, जबकि काफी गांवों में पूरी लाइन भी नहीं बिछवाई गई। गुणवत्ता भी ठीक नहीं थी। हालात यह है कि पेयजल लाइन चंद महीनों में टूट गई और पानी लीकेज होने के कारण खड़ंजे धंसने शुरू हो गए। घरों तक पेयजल नहीं पहुंच रहा है तो रास्ते भी खराब हो गए है। इससे लोगों की गांवों में परेशानी बढ़ गई है।
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अब दूसरे चरण में 84 गांवों में 190 करोड़ से शुरू कराया काम
पहले चरण में जिन गांवों में पेयजल लाइन बिछाई गई थी, वहां की हालत पहले ही खराब है। अब दूसरे चरण में 84 गांवों में 190 करोड़ रुपये से पेयजल लाइन बिछाने पर काम शुरू हो गया है। इनमें से 23 गांवों में ट्यूबवेल पर काम चल रहा है। पेयजल लाइन बिछाने का काम गुजरात की एलसी इंट्रा और टीसीईएल कंपनी को दिया हुआ है।
बिजरौल, बिलौचपुरा, लुहारा समेत कई गांवों में हालत खराब
बिजरौल गांव में करीब पांच महीने पहले पेयजल लाइन कुछ हिस्से में बिछाई गई और उसमें पानी की सप्लाई शुरू कर दी गई। मगर, पाइप कई जगह से फट गए, जिससे पानी लीकेज होने से खड़ंजे धंसने शुरू हो गए है। गांव में कई सड़कें काफी लंबाई तक धंस गई है। पेयजल की सप्लाई भी नहीं होती है। ऐसे ही बिलौचुपरा गांव में टंकी का निर्माण करते हुए पेयजल लाइन बिछाई गई थी। यहां भी पाइप फटने से घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है, जिससे लोगों को हैंडपंप से पानी भरना पड़ता है। लुहारा गांव में भी पेयजल को ग्रामीण तरस गए है। पाइप लाइन फटने से पानी जगह-जगह भरा रहता है और रास्ता भी खराब हो गया है।
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किसी को हैंडपंप लगवाना पड़ा, कोई दूसरे के भरोसे
बिलौचपुरा गांव की शरीफन का कहना है कि पेयजल लइन के पाइप फटने से उनके घर तक पानी नहीं पहुंचता है। पानी की किल्लत के कारण हैंडपंप लगवाना पड़ा, जिससे समस्या दूर हो सके। वसीमा कहती है कि टंकी को लगवाने के बाद भी उनके घर तक पानी नहीं पहुंचता है। इस कारण परेशानी होती है। उन्हें दूसरों के घरों से हैंडपंप से पानी लेकर आना पड़ता है।
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गांवों में टंकी लगवाने के साथ ही लाइन बिछवाने की जिम्मेदारी कंपनी को दी हुई है। पेयजल लाइन शुरू करने के चार महीने तक कोई परेशानी होती है तो इसकी मरम्मत की जिम्मेदारी कंपनी की होती है। इसके बाद पानी का बिल लेने से लेकर व्यवस्थाएं बेहतर करने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की होती है। अगर किसी जगह पहले समस्या हुई है तो उसकी जांच कराकर ठीक कराई जाएगी। - अविनाश गुप्ता, एक्सईएन जल निगम
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