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आखिर किसके मोबाइल से वायरल होते हैं प्रश्न-पत्र

Wed, 28 Feb 2018 12:38 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बागपत
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लीक किया गया पेपर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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यूपी बोर्ड की परीक्षा में प्रश्नपत्र वायरल होने का पहला मामला नहीं है। परीक्षा के दौरान इससे पहले भी हस्तलिखित प्रश्नपत्र वायरल हुए, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ते रहे कि इनमें किसी प्रश्न का मिलान मूल पेपर से नहीं हुआ। इसकी जांच नहीं कराई गई कि आखिर प्रश्नपत्र की हस्तलिखित प्रतियां कहां से वायरल हो रही है। वह कौन लोग हैं, जो परीक्षा की गोपनीयता भंग करने की साजिश रच रहे हैं।
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इस बार बोर्ड परीक्षा का समय जरूर बदला, लेकिन शिक्षा क्षेत्र के माफिया माहौल खराब करने से बाज नहीं आए। मंगलवार को प्रश्नपत्र की मूल कापी वायरल हुई, लेकिन इससे पहले भी परीक्षाओं की हस्तलिखित कापी वायरल हो चुकी है।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों तक भी यह कॉपियां पहुंची, लेकिन यह दावा किया गया कि जो प्रतियां लीक हुई है, उनमें किसी किसी प्रश्न का मिलान मूल प्रति से नहीं हुआ है। सवाल है कि आखिर कौन है जो बोर्ड परीक्षा की गोपनीयता भंग करने की कोशिश कर रहा है।
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किसके मोबाइल से यह पेपर वायरल होते हैं और कुछ ही घंटे में अधिकारियों तक पहुंच जाते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। डीआईओएस पीके मिश्रा का कहना है कि पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है। हस्तलिखित प्रतियों के प्रकरण की भी जांच होगी। जो भी गोपनीयता भंग करने की कोशिश कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

यूपी बोर्ड परीक्षा में गड़बड़ी का खेल पहले ही दिन से सामने आने लगा था। संयुक्त शिक्षा निदेशक दिव्यकांत शुक्ल ने सख्ती की तो पहले दिन से गड़बड़ी सामने आने लगी थी। पहली परीक्षा में ही टीकरी के परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी कैमरे को तोड़ दिया था। 

आठ फरवरी को छपरौली के वृहद समाज इंटर कॉलेज में तीन संदिग्ध कक्ष निरीक्षक पकड़े । इसके बाद दोघट में भी संदिग्ध कक्ष निरीक्षक पकड़े गए। संयुक्त शिक्षा निदेशक ने कई दिन तक ताबड़तोड़ छापेमारी की।

कई केंद्र व्यवस्थापक भी बदले गए। कोचिंग सेंटरों के शिक्षकों की ड्यूटी बतौर कक्ष निरीक्षक लगा दी, इसके बाद डीआईओएस दफ्तर के कर्मचारियों की भी जांच शुरू हुई। जांच का यह मामला चल ही रहा है कि अब पेपर वायरल होने का मामला गले की फांस बनता दिख रहा है।

किस काम के सीसीटीवी कैमरे
बागपत। बोर्ड परीक्षा को सुचारु तरीके से कराने के लिए इस बार प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं। शासन की मंशा थी कि परीक्षा के दौरान होने वाली प्रत्येक गड़बड़ पर नजर रखी जाएगी, लेकिन कैमरों के माध्यम से अभी कोई बड़ी चूक पकड़ में नहीं आ सकी है। हैरत की बात है कि परीक्षा का पेपर लीक हो गया कैमरों से भी कुछ पकड़ में नहीं आया।

पिछले साल भी लीक हुआ था पेपर, नहीं हुई जांच
बागपत। पिछले वर्ष 19 अप्रैल को 12वीं कक्षा के अंग्रेजी विषय का द्वितीय प्रश्नपत्र लीक हो गया । परीक्षा से करीब दो घंटे पहले ही व्हाट्स एप के जरिए यह प्रश्नपत्र परीक्षार्थियों तक पहुंच गया। जिले मेें प्रश्नपत्र के लिफाफे सही मिले ।

बोर्ड ने परीक्षा दोबारा कराई, लेकिन हैरान कर देने वाली बात यह है कि पिछले साल के प्रश्नपत्र लीक मामले की अब तक जांच ही नहीं हुई। डीआईओएस पीके मिश्रा का कहना है कि साइबर सैल से जांच कराने के लिए तत्कालीन डीएम और एसपी को पत्र लिखा था, लेकिन अब तक जांच नहीं हुई। अब तक यह भी पता नहीं लगाया जा चुका है कि पिछले साल का पेपर कहां से लीक हुआ था।
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