बागपत। तेंदुए की मौत के मामले में वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई है। मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र ललित कुमार वर्मा ने स्वीकार किया कि मौके पर मौजूद कर्मियों से कई चूक हुई हैं, इनकी जांच शुरू करा दी है। दोषियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। माना कि तेंदुए को बचाया जा सकता था।
बुधवार को दिनभर तेंदुए की मौत के कारणों पर वन विभागीय अधिकारी माथा-पच्ची करते रहे। मुख्य वन संरक्षक के अलावा वन संरक्षक एवं अपराध अनुसंधान नोएडा एचडी गिरीश, सहारनपुर मंडल के वन्य जीव संरक्षक वीके जैन, डीएफओ बागपत अनिल कुमार मिश्रा, सेवानिवृत्त डीएफओ एवं वन्य जीव विशेषज्ञ जीएस खुशारिया, रेंजर बागपत राजेश कुमार ने जांच की और तेंदुए की मौत की वजह तलाशी। वर्मा ने माना है कि तेंदुए को बचाया जा सकता था। मौके पर जाल और पिंजरा समय रहते नहीं पहुंचा, जिस तरह से रेस्क्यू किया गया, उसमें भी कुछ खामियां थी। इंजेक्शन दिलाने में भी चूक बरती गई।
मौके पर पुलिस की मदद से ग्रामीणों को करीब 100 मीटर पीछे हटाया जा सकता था, जिससे वनकर्मियों को कार्य करने में आसानी होती। उन्होंने बताया कि प्रकरण की जांच डीएफओ बागपत को दी गई है। सात दिन में रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा विसरा की जांच रिपोर्ट भी सात से दस दिन में मिल जाएगी, इसके बाद मौत की अन्य वजह भी सामने आ जाएंगी।