बागपत। जिला कारागार में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बार निलंबित जेलर, डिप्टी जेलर और बंदी रक्षकों की गतिविधियों की पड़ताल की जा रही है। विभागीय जांच में जुटे अधिकारियों ने बंदियों से भी इस बाबत जानकारी ली है। कॉल डिटेल के सहारे छानबीन की जा रही है। जांच कराई कि निलंबित जेलकर्मी किस-किसके संपर्क में थे।
बागपत जेल में नौ जुलाई की सुबह सवा छह बजे मुन्ना बजरंगी की हत्या की। निलंबित जेलर यूपी सिंह ने कुख्यात सुनील राठी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। मामले की जांच चल रही है। राठी को फतेहगढ़ जेल भेजा। कारागार विभाग की जांच में कई महत्वपूर्ण बिंदू सामने आए हैं। निलंबित जेल अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच चल रही है। बंदियों से भी इस बाबत जानकारी जुटाई जा रही है कि आखिर कारागार में पिस्टल कैसे और किसकी लापरवाही से पहुंचा। सुनील राठी और उसके गुर्गों को जेल में खुली छूट किसके इशारे पर थी। कर्मचारियों के मोबाइल नंबरों की डिटेल भी खंगाली जा रही है।
कई हिरासत में, लेकिन नतीजा सिफर
बागपत। बजरंगी की हत्या के मामले में पुलिस ने कई संदिग्धों को हिरासत में लिया है। अभी तक 50 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा रही है, लेकिन नतीजा सिफर है।
हत्या की वजह तलाश रही है पुलिस
बागपत। सुनील राठी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया। पिस्टल बरामद हो चुका है, अभी तक पुलिस को हत्या की वजह नहीं मिल सकी है। यही कारण है कि सुनील राठी गैंग के गुर्गों और बंदियों से जानकारी लेकर वारदात के तार जोड़े जाने की कोशिश की जा रही हैं।