बड़ौत (बागपत)।
सऊदी अरब में बंधक बनाए नगर के दो युवक महीनों बाद घर लौटे तो उनके चेहरे पर खौफ दिखाई दिया। दोनों युवक नौकरी करने के लिए सऊदी अरब के रियाद में गए थे। घर लौटने पर युवकों ने परिजनों को आपबीती बताई तो परिजन भी दहशत में हैं।
बड़ौत निवासी सादिक अली और उनके दोस्त नफीस अहमद ने मुंबई की एमजी घी वाला ग्लोबल एजेंसी की तरफ से इंटरनेट पर सऊदी अरब में एल्युमिनियम फेब्रिकेटर की आवश्यकता का विज्ञापन देखकर मुंबई के एजेंट प्रदीप बुल्ले वान से फोन पर संपर्क किया था। एजेंट ने दोनों को मुंबई बुलाकर सऊदी अरब की कंपनी लामा सात के नाम पर एग्रीमेंट कराकर प्रतिमाह 36000 हजार रुपये और मुफ्त भोजन आवास देने का आश्वासन देकर भेजा।
वतन लौटकर आए सादिक अली और नफीस का आरोप है कि उन्हें वहां पर एक डेढ़ महीने काम कर वेतन न देेकर बंधक बना लिया। वहां पर उन्हें बंद कमरे में भूखा प्यासा रखकर घोर यातनाएं दी और जान से मारने का प्रयास किया। वह किसी तरह जान बचाकर दूतावास पहुंचे और वहां तैनात अधिकारी मोहम्मद इमदाद आलम से मिले। आरोप लगाया कि इस दौरान कई बार उन्हें दूतावास से फैसला करने के लिए बाहर बुलाया और उन्हें दोबारा से बंधक बनाने का प्रयास कर जान से मारने का प्रयास किया। उन्होंने बताया वेस्ट यूपी से ऐसे सैकड़ों युवकों को वहां पर नौकरी दिलाने के बहाने बंधक बना रखा है। सादिक और नफीस की आपबीती सुनकर परिजन भी दहशत में आ गए।