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वन विभाग की नहीं बदली चाल

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बागपत। तेंदुए के लिए रेस्क्यू से लेकर पोस्टमार्टम और निस्तारण तक वन विभाग की चाल बदलती नजर नहीं आई। पहले रेस्क्यू में देरी हुई, जिस वजह से तेंदुए की जान चली गई। इसके बाद पोस्टमार्टम में देरी होते होते दो टीम बदली और 24 घंटे का समय बीत गया। इसके बाद देर रात तक निस्तारण का कार्य चलता रहा। बार-बार कर्मचारियों को दुकानों पर भेजा गया और सामान मंगाया जाता रहा।
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बेहोशी के इंजेक्शन की होगी जांच
बागपत। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. राजपाल सिंह का कहना है कि मौत का प्राथमिक कारण विंड पाइप ब्रेक होना आया है। विसरा प्रिजर्व कर लिया गया है, डॉक्टर ने जो इंजेक्शन दिया था, उसकी जांच बरेली के आईवीआरई सेंटर में होगी, जहां यह पता चलेगा कि इंजेक्शन से कोई नुकसान हुआ है या नहीं।

तेंदुए को बचाने के लिए ग्रामीणों ने किए थे जतन
बागपत। तेंदुए के पकड़े जाने की वीडियो और फोटो खूब वायरल हो रहे हैं। जिस वक्त तेंदुए पर जाल फेंका गया, ग्रामीणों ने चिल्ला-चिल्लाकर कहा था कि कोई लाठी का प्रयोग नहीं करेगा। तेंदुए को लाठी नहीं मारी जानी चाहिए। इसके बाद पिंजरे में पकड़े जाने के बाद ग्रामीणों ने उसके पैर बांधे और अधिक धूप होने के चलते चादर से छांव करने की कोशिश भी की । कुछ ग्रामीणों ने तेंदुए के मुंह में पानी भी डाला। ग्रामीण वेदपाल सिंह, राजीव शर्मा कहते हैं कि ग्रामीणों ने साहस का परिचय देकर तेंदुए को पकड़ा और वन विभाग को सुपुर्द किया, लेकिन इसके बाद भी उसकी मौत हुई है। वन विभाग अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। किसी निर्दोष ग्रामीण के खिलाफ अगर कार्रवाई की गई तो पूरा गांव एकजुट होगा।
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