बागपत। ककौर गांव के जंगल में शिकारी के खटके (शिकंजे) में फंसकर जिंदा बचाकर वन विभाग की सुपुर्दगी में जिंदा दिए गए तेंदुए की मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। 24 घंटे बाद हुए पोस्टमार्टम से पता चला कि तेंदुए की अत्यधिक दबाव पड़ने से सांस की नली फट गई थी और ब्लीडिंग होने से फेफड़ों में भी खून जम गया था। हालांकि वन विभाग ने विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए आईवीआरआई, बरेली भेजा है। मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र ललित कुमार वर्मा ने डीएफओ बागपत को विभागीय जांच सौंपते हुए एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा वन संरक्षक एवं अपराध अनुसंधान नोएडा एचडी गिरीश भी मामले की जांच कर रहे हैं। खटका लगाने वाले अज्ञात व्यक्ति समेत दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
मंगलवार को बड़ौत रेंज के जंगल में जंगली सूकर पकड़ने को लगाए गए खटके में यह तेंदुआ फंस गया था, जिसे ग्रामीणों ने जिंदा बचा लिया था। वन विभाग का पिंजरा आने तक लोग तेंदुए को जाल में फंसाकर लाठियों से दबाए बैठे रहे थे। विभाग की लापरवाही से करीब दस घंटे बाद इसकी मौत हो गई थी। बुधवार को मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र ने डीएफओ कार्यालय पहुंचकर मामले की जानकारी ली। उनकी देखरेख में रेंज में ही छह सदस्यीय टीम ने दोपहर करीब तीन बजे इसके शव का पोस्टमार्टम किया। वर्मा ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि तेंदुए की सांस की नली फटने से फेफड़ों में रक्त गया और इस कारण से उसकी मौत हुई। वहीं, खटके में फंसे पंजे का नाखून टूटा और पंजा चोटिल मिला। तेंदुआ भूखा और प्यासा भी था। बेहोशी के लिए ओवरडोज से मौत के सवाल पर उन्होंने कहा कि इंडियन वेटनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली में विसरा की जांच के बाद ही इस बारे में पता चलेगा। खटका लगाने वाले व्यक्ति समेत खेत मालिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी है। बड़ौत रेंजर राजपाल सिंह ने बताया कि गुरुवार को मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
निस्तारण के लिए छिड़का गया मिट्टी का तेल
बागपत। बागपत रेंज में तेंदुए के निस्तारण के लिए देर रात तक कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहे। मिट्टी का तेल लकडिय़ों पर छिडक़र आग जलाई गई और तेंदुए का निस्तारण किया गया।
आईवीआरई से नहीं पहुंची टीम
पोस्टमार्टम के लिए पहले आईवीआरआई बरेली से टीम आनी थी, लेकिन विभागीय कारणों से नहीं पहुंची। इसके बाद मुख्य वन संरक्षक पश्चिमी क्षेत्र ललित कुमार वर्मा ने स्थानीय स्तर पर टीम बनाकर पोस्टमार्टम कराया। टीम में पशु चिकित्साधिकारी मेरठ डॉ. बीपीएस यादव, डिप्टी सीवीओ बागपत डॉ. सोमदेव चौहान, पशु चिकित्सक डॉ. रविश कसाना, वन संरक्षक एवं अपराध अनुसंधान नोएडा एचडी गिरीश, संजीव यादव, एनिमल केयर सोसायटी के अंशुमाली रस्तौगी शामिल रहे। पोस्टमार्टम के बाद रेंज में ही तेंदुए के शव का निस्तारण करा दिया गया।