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Baghpat News: चाचा आपके बिना मन नहीं लगेगा, कहकर शुगड़पाल को ले गए थे भतीजे

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बागपत। चाचा आपके बिना यात्रा में मन नहीं लगेगा। आपको हमारे साथ जरूर चलना होगा। यही बात कहकर बदायूं जिले के चेतु नंगला निवासी शुगड़पाल उर्फ सुगमपाल यादव को उनका भतीजा विपिन और दिलीप अपने साथ गोगामेड़ी बागड़ धाम में दर्शन करने ले गए थे लेकिन बागड़ धाम की यात्रा शुगड़पाल की अंतिम यात्रा बन गई। इस हादसे में जान गंवाने वाले सभी किसान परिवारों के सदस्य हैं तो कई परिवारों के मुखिया भी नहीं बचे।
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हादसे में किसान शुगड़पाल यादव की मौत होने का पता चलने पर उनका बेटा अमन रिश्तेदारों के साथ पोस्टमॉर्टम हाउस पर पहुंच गया। अमन ने बताया कि उसके पिता हर साल गांव के लोगों के साथ गोगामेड़ी बागड़ धाम पर दर्शन करने जाते थे, लेकिन इस बार बागड़ धाम जाने का उनका मन नहीं था। उसके पिता को रिश्तेदारों ने जाने के लिए कहा तो उन्होंने मना कर दिया। उसके तहेरे भाई विपिन और दिलीप उसके पिता को बागड़ धाम लेकर चलने की जिद पर अड़ गए और कहने लगे कि चाचा तुम्हारे बिना यात्रा में मन नहीं लगेगा। क्योंकि उसके पिता हंसी-मजाक करते रहते थे। तहेरे भाइयों के ज्यादा जिद करने पर उसके पिता धाम पर जाने के लिए तैयार हो गए। तहेरे भाइयों और पिता के साथ छोटा भाई निखिल भी धाम पर चले गए। इस हादसे में निखिल, विपिन और दिलीप भी घायल हैं। किसान शुगड़पाल के परिवार में तीन बेटे हैं, जो खेतीबाड़ी करते हैं।

साधु यादव और उनकी पत्नी समेत परिवार के पांच सदस्यों की मौत
बदायूं जिले के अल्लापुर चमारी गांव निवासी जयसिंह उर्फ साधु यादव अपने पूरे परिवार के साथ बागड़ धाम पर दर्शन करने गए थे। इसमें साधु यादव के साथ उनकी पत्नी मुन्नी, भाई प्रेम सिंह, भाभी प्रेमवती, बेटी सोनी, दामाद विकास, उनकी बेटी दीक्षा, बेटे सौरभ समेत अन्य सदस्य शामिल थे। रविवार रात हुए हादसे में अकेले साधु यादव, उनकी पत्नी मुन्नी, भाई प्रेम सिंह, धोती बेटी दीक्षा, धोते सौरभ की मौत हो गई, जबकि भाभी प्रेमवती, बेटी सोनी, दामाद विकास घायल हैं, जिनका मेरठ मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है।
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स्ट्रेचर पर पड़ी घायल मां बेटे को तलाशती रही, उसकी हो चुकी थी मौत
श्रद्धालुओं की पिकअप पलटने पर घायलों को अस्पताल पहुंचा दिया गया और मृतकों के शवों को पोस्टमॉर्टम हाउस में रखवा दिया। इस दौरान मल्हारपुर निवासी सुल्तानश्री का चिकित्सक उपचार कर रहे थे, लेकिन उसकी नजरें अपने बेटे जितेंद्र उर्फ अमित को तलाशती रहीं, जिसकी मौत हो चुकी थी। चिकित्सकों ने हालत गंभीर होने पर सुल्तानश्री को मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, लेकिन एंबुलेंस में सवार होने तक अपने बेटे को पुकारती रही, लेकिन वह नहीं आया। सोमवार को पोस्टमॉर्टम हाउस पर पहुंचे सुखपाल ने बताया कि उनका भाई जितेंद्र चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर का था।
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