अमीनगर सराय। डौला गांव के चंद्रबोस ने पुराना ऋण उतारने के लिए दोबारा ऋण लिया, मगर वह बढ़ता चला गया और इस ऋण के कारण ही उनकी मौत हो गई। क्योंकि इस ऋण को जमा नहीं होने पर जेल भेजने की धमकी मिलने पर वह रविवार रातभर सो नहीं पाए। परिजनों के चिंता का कारण पूछने पर भी कुछ नहीं बताया। इसके बाद रविवार की सुबह फांसी लगाकर जान दे दी।
किसान चंद्रबोस अपने हिस्से की चार बीघा जमीन पर खेड़ीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। उनके दो बेटे अनुज और शिवा निजी कंपनी में नौकरी करते हैं। वर्ष 2017 में सबसे पहले केनरा बैंक से ऋण लिया था। उसे उतारने के लिए सहकारी समिति से ऋण लिया। ऋण कुछ चुकाया, मगर परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब होने पर तीसरी बार केनरा बैंक शाखा से फिर ऋण लिया। चंद्रबोस पर केनरा बैंक से 1.70 लाख और सरकारी समिति का पांच हजार ऋण था। यह जमा नहीं होने पर ब्याज बढ़ने लगा।
बैंक से तीनों ऋण की आरसी जारी होने पर संग्रह अमीन अपने सहायक के साथ मिलकर तकादा करने के लिए घर जाने लगे, जो किसान चंद्रबोस को अच्छा नहीं लगता। गांव में बदनामी होने के डर से वह गुमसुम रहने लगे और ऋण की रकम जमा करने का प्रयास भी किया। परिजनों ने बताया कि जेल भेजने की धमकी मिलने पर किसान चंद्रबोस पूरी तरह टूट गए और यह कदम उठा लिया।
इस पर मजदूर किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अन्नु मलिक व भाकियू जिला प्रवक्ता हिम्मत सिंह समेत अन्य कार्यकर्ता डौला गांव पहुंचे। उनके साथ ही किसान के परिजनों ने घर के बाहर धरना देकर हंगामा शुरू कर दिया। उन्होंने मृतक का कर्ज माफ करने, अमीन और कर्मी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने, मुआवजा दिलाने और मृतक के बेटे को सरकारी नौकरी दिलाने की मांग की। मांग पूरी नहीं होने पर शव लेने और अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इसको लेकर देर रात तक किसान नेताओं, परिजनों और अधिकारियों के बीच वार्ता चलती रही लेकिन समाधान नहीं निकल सका।