दंपतियों ने दिखाई समझदारी, कहीं दो तो किसी के घर एक बार गूंजी किलकारी
बड़ौत। जिले में कई ऐसे दंपती हैं, जो स्वयं परिवार नियोजन अपना कर दूसरों के लिए नजीर बन गए हैं। इन लोगों को कोई समझाने नहीं गया। इन्होंने छोटे परिवार की महत्ता को खुद समझा और बास्केट ऑफ चॉइस से मनपसंद साधन का चुनाव किया। वे मानते हैं कि छोटा परिवार सुख का आधार होता है। उधर, स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़े भी बयां कर रहे हैं कि लोग परिवार नियोजन को लेकर जागरूक हो रहे हैैं।
- केस नंबर एक
इन दंपतियों की राह पर नगर की बिजरौल रोड निवासी विनीत मलिक भी हैं। बताते हैं कि शादी के दो वर्ष बाद निर्णय लिया कि उनके एक ही बच्चा होगा और उसके बाद वे लोग परिवार नियोजन अपना लेंगे। उनके एक बच्चा आरव है। इन लोगों ने बिना किसी को बताए आपसी सहमति से परिवार नियोजन अपनाया। वह मानते हैं कि छोटा परिवार सुख का आधार होता है।
- केस नंबर दो
सचिन राठी व रूबी राठी बताते हैं कि दो बेटों के बाद परिवार नियोजन अपनाने का फैसला लिया। सचिन राठी का कहना है कि बेटों को अच्छी शिक्षा दे रहा हूं। कई बार रिश्तेदारों ने भी कहा कि जितना खर्च आप बच्चों को पढ़ाने में कर रहे हैं, उतने में उनकी शादियां हो जाएंगी, लेकिन मेरे लिए बच्चों की पढ़ाई पहले महत्वपूर्ण है। उधर, रूबी राठी का कहना है कि बढ़ती जनसंख्या ही आज देश में बेरोजगारी का मुख्य कारण है। महंगाई व बेरोजगारी के इस दौर में हम दो हमारे दो का फॉर्मूला ही कारगर साबित होगा।
- केस नंबर तीन
जितेंद्र व पुष्पा की शादी को लगभग 21 साल हो गए हैं। शादी के बाद एक बेटा जतिन हुआ। इस समय जतिन बीटेक फाइनल की पढ़ाई कर रहा हैै। पति-पत्नी इकलौते बेटे की पढ़ाई व स्वास्थ्य पर ध्यान देने में लगे हुए हैं। पुष्पा का कहना है कि परिवार खुशहाली का जीवन व्यतीत कर रहा है। कहा कि देश की बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। छोटा परिवार सुखी परिवार होता है। जितेंद्र का कहना है कि लोग जनसंख्या नियंत्रण के प्रति जागरूक नहीं हुए तो आने वाले समय में देश में भुखमरी, बेरोजगारी के अलावा विकास कार्यों पर भी विपरीत प्रभाव पड़ेगा।
लोग खुद हो रहे जागरूक
सीएचसी अधीक्षक डॉ. विजय कुमार ने बताया कि परिवार नियोजन सेवाओं के प्रति लोग सजग हो रहे हैं। कोविड काल में भी लोगों ने सेवाओं के प्रति रुचि दिखाई है।
तीन साल में हजारों लोगों ने कराई नसबंदी
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी किए गए आंकड़े से पता चलता है कि लोग परिवार नियोजन को लेकर जागरूक हो चुके हैं। पिछले तीन साल में बड़ौत ब्लाक की बात करें तो लगभग 2050 लोगों ने नसबंदी कराई है, जिसमें 1530 महिलाएं व 520 पुरुष शामिल हैं। नसबंदी कराने को लेकर महिलाएं पुरुषों से काफी आगे हैं।
छोटा परिवार सुखी परिवार का संदेश देते जितेंद्र व उनकी पत्नी पुष्पा- फोटो : BARAUT
हम दो हमारे दो का संदेश देते सचिन राठी व उनकी पत्नी रूबी राठी- फोटो : BARAUT