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कोरोना संक्रमण : सूखने लगा ब्लड बैंक का खून

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’प्रवीण शर्मा
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बागपत। कोरोना संक्रमण और कोरोना कर्फ्यू का असर ब्लड बैंक में भी दिख रहा है। 300 यूनिट क्षमता वाले जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में केवल 39 यूनिट रक्त बचा है। ब्लड बैंक में सुरक्षित रक्त का प्रयोग डिलीवरी के लिए किया जा रहा है। बैंक में एबी निगेटिव की एक भी यूनिट नहीं है और ए व बी निगेटिव की एक-एक यूनिट ही शेष है। मेरठ के मेडिकल कालेज एल-3 अस्पताल बनने और जिला अस्पताल में ओपीडी बंद होने के कारण खून की डिमांड घट गई है। कोरोना संक्रमण के कारण स्वास्थ्य विभाग की ओर से पिछले दो माह से रक्तदान के लिए कोई कैंप भी नहीं लगवाया गया है। इमरजेंसी होनेे पर रक्त के अभाव में मुश्किल हो सकती है। इसके लिए जहां स्वास्थ्य विभाग को जागरूक होना होगा वहीं रक्तदान करने वालों को भी आगे आना होगा।
35 दिन के बाद खराब हो जाता है रक्त
- ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. अनुराग वार्ष्णेय का कहना है कि रक्त को 35 दिन से अधिक संग्रहित नहीं किया जा सकता है। 35 दिन से अधिक होने पर रक्त खराब हो जाता है और उसे नष्ट करना पड़ता है। मार्च माह में जिले 20 यूनिट मेरठ के मेडिकल कॉलेज भेजी गई थी।
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संक्रमण काल में घट गई रक्त की डिमांड
- जिला ब्लड बैंक से मेडिकल कालेज में रक्त की सप्लाई की जाती है। कोरोना के मरीजों के उपचार के लिए मेडिकल कालेज को एल-3 श्रेणी का अस्पताल बना दिया गया है। इसके अलावा जिला अस्पताल भी बंद है। जिसके कारण रक्त की डिमांड घट गई है। डिमांड कम व संक्रमण बढ़ने के कारण डेढ़ माह से रक्दान शिविर भी नहीं लगाया गया है।
ब्लड बैंक में रक्त की उपलब्धता
ग्रुप यूनिट
ए पॉजिटिव 10
बी पॉजिटिव 07
ए निगेटिव 01
बी निगेटिव 01
एबी पॉजिटिव 03
एबी निगेटिव 00
ओ पॉजिटिव 14
ओ निगेटिव 03
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