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जमीनों के बंटवारे की खींचतान में लटका कॉरिडोर का मुआवजा

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संवाद न्यूज एजेंसी
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बागपत। बड़ौत के रहने वाले राजेंद्र के परिवार में पांच बीघा जमीन है। राजेंद्र का अपने सगे दो भाइयों और दो चचेरे भाइयों से जमीन का मौखिक तौर पर बंटवारा हो चुका है। सभी एक-एक बीघा जमीन बांटकर खेती कर रहे हैं। कागजों में किसी के हिस्से की जमीन की जगह का खुलासा नहीं किया गया। अब राजेंद्र को मिली जमीन का दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण कर लिया गया है। राजेंद्र ने मुआवजे के लिए फाइल लगाई तो अन्य चार भाइयों ने भी जमीन में अपना नाम दर्ज बताते हुए मुआवजे में हिस्से के लिए दावा कर दिया। अब विवाद होने से मुआवजा अटक गया है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहण की गई जमीन में इस तरह का विवाद केवल बड़ौत के राजेंद्र के परिवार के बीच ही नहीं है। अभी तक करीब 80 से ज्यादा परिवारों के बीच इस तरह का विवाद सामने आ चुका है। कई परिवार तो ऐसे है, जिन्होंने जमीन का मौखिक तौर पर 20-20 साल पहले बंटवारा कर लिया है और अपनी-अपनी जमीन पर कब्जा लेकर खेती कर रहे हैं। मगर, अब जमीन का अधिग्रहण होने के बाद मुआवजा मिलने का समय आया तो खसरा खतौनी में परिवार के सभी हिस्सेदारों के नाम होने से आपसी विवाद शुरू हो गया। अधिकारी भी किसी एक को कब्जे के आधार पर मुआवजा नहीं दे सकते हैं। कागजों में जिनके नाम दर्ज हैं, उन सभी को मुआवजा देंगे या आपत्ति आने पर विवाद निपटने तक मुआवजा लटका रहेगा। ऐसे में अधिकारी किसानों को आपसी विवाद निपटा कर कागजों में जमीन का बंटवारा करने की सलाह दे रहे हैं।
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कॉरिडोर में 32 गांवों के 5,268 किसानों की जमीन का अधिग्रहण
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत में मवीकलां से मुजफ्फरनगर की सीमा तक 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण हुआ है। इसके अलावा 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन का अधिग्रहण भी हुआ है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है। इसमें से करीब 300 किसानों ने 150 करोड़ से ज्यादा का मुआवजा अभी तक ले लिया है।
जमीन बंटवारे का विवाद कोर्ट तक पहुंच रहा
इकोनॉमिक कॉरिडोर के मुआवजे ने परिवारों के बीच जमीनों के विवाद को बढ़ा दिया है। इस तरह के विवाद केवल अधिकारियों के पास तक ही नहीं पहुंच रहे हैं, बल्कि आपसी सहमति नहीं बनने पर विवाद कोर्ट तक भी जा रहे हैं। इस स्थिति में विवाद लंबा चलने पर मुआवजा दिए बिना ही प्रशासन की ओर से कब्जे की कार्रवाई की जाएगी। ।
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जमीन का मौखिक रूप से बंटवारा करने वाले काफी लोग अब मुआवजे की चाहत में आपत्ति जता रहे हैं कि जिस जमीन का अधिग्रहण किया गया है, उसमें वह भी हिस्सेदार है। ऐसे मामलों में आपसी विवाद सुलझाने के लिए कहा जा रहा है। सके बाद भी विवाद नहीं निपटता है तो मुआवजा स्थिर करके जमीन पर कब्जा लिया जाएगा। - अमित कुमार, एडीएम
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