बागपत। दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहीत जमीन के मुआवजे की फाइलें कलक्ट्रेट से गायब हो गईं। भू-लेख कार्यालय में फाइलों को जमा कराया गया था। फाइलों के नहीं मिलने पर किसानों ने सोमवार को हंगामा कर दिया। डीएम और एडीएम से शिकायत की गई तो फाइलों को तलाश कराने का आश्वासन दिया गया।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए बागपत में मवीकलां से मुजफ्फरनगर की सीमा तक 32 गांवों के 5286 किसानों की 292 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है तो 23 हेक्टेयर सरकारी जमीन भी अधिग्रहीत की गई है। किसानों को जमीन का 824 करोड़ रुपये से ज्यादा का मुआवजा दिया जाना है और मुआवजा लेने के लिए किसान कलक्ट्रेट में पहुंच रहे हैं।
कलक्ट्रेट में भू-लेख कार्यालय में सोमवार को टीकरी, गुराना व बिजरौल के कई किसान पहुंचे और मुआवजा जल्द जारी कराने की मांग करने लगे, लेकिन वहां उनकी फाइल ही नहीं मिली। फाइलों को घंटों तक कर्मी तलाश करते रहे। इसके बावजूद भी फाइल नहीं मिलने पर किसान भड़क गए और हंगामा करने लगे। किसानों की कर्मियों के साथ नोकझोंक हुई, जिससे कर्मियों ने हाथ खड़े कर दिए और किसान खुद ही अपनी फाइलों को तलाश करने में लग गए। इसके बाद भी उनकी फाइल नहीं मिली तो डीएम राजकमल यादव व एडीएम से शिकायत की गई। जहां उनको फाइल तलाश कराने का आश्वासन दिया गया।
किसान बोले, फाइलों को दोबारा कैसे तैयार कराएंगे
कलक्ट्रेट में मुआवजे के लिए पहुंचे टीकरी गांव के अरुण, राजू, गुराना गांव के संजीव, बिजरौल गांव के उमंग समेत अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि फाइलें गायब होने से परेशानी झेलनी पड़ रही हैं। अब दोबारा फाइल कैसे तैयार होगी, क्योंकि उसमें काफी कागज लगाए जाते हैं और उनको एकत्र करने में काफी समय लग जाता है। अधिकारियों से फाइलों को तलाश कराने की मांग की गई।
कोट...
फाइलों की समस्या को लेकर किसान मिले थे। उनकी फाइलें किसी जगह कार्यालय में होगी और उनको तलाश कराकर किसानों को मुआवजा दिलाया जाएगा। किसानों को परेशान नहीं होने देंगे। - अमित कुमार, एडीएम