बागपत। खनन सामग्री की फर्जी रॉयल्टी बनाकर सरकारी खजाने को चूना लगाने के मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश समेत अन्य जनपदों के लोक निर्माण विभाग कार्यालयों में तैनात लिपिकों को जल्द निलंबित किया जाएगा। विभाग के अफसरों ने इसके लिए रिपोर्ट तैयार कर ली है। उच्चाधिकारियों की संस्तुति का इंतजार है।
मेरठ की एसटीएफ टीम ने चार दिन पहले निवाड़ा गांव के इंडियन नर्सिंग होम पर छापा मारा था। इस दौरान खनन सामग्री की फर्जी रॉयल्टी बनाने वाले एक गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। उनसे पूछताछ में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों के लोनिवि कार्यालयों में तैनात लिपिकों और ठेकेदारों की भूमिका उजागर हुई। गिरोह के सदस्यों के मोबाइल से व्हाट्सएप पर फर्जी रॉयल्टी भेजने और उनसे जुड़ी चैट भी मिली थी। पुलिस ने बागपत, मेरठ, मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर, कानपुर, गाजियाबाद और नोएडा के लोनिवि के दस लिपिकों और ठेकेदारों को नामजद किया है। कुल 23 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में लोनिवि के बाबू मंदीप, नईम, तालिब, फिरोज और आरिफ शामिल हैं। ये सभी आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
लोनिवि के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार ने बताया कि जेल भेजे गए लिपिक मंदीप को निलंबित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि विभाग ने अन्य दोषी लिपिकों के खिलाफ भी कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर ली है। एक अन्य आरोपी को पुलिस द्वारा पकड़कर पूछताछ शुरू करने की बात सामने आई है। हालांकि, पुलिस ने इस गिरफ्तारी से इन्कार किया है। इस मामले की जांच अधिकारी बृजेश कुमार ने बताया कि जल्द ही अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गिरोह के अन्य सदस्यों और इसमें शामिल सभी लोगों की पहचान की जा रही है। पुलिस इस बड़े घोटाले की तह तक जाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।