बागपत। गर्मी में कुपोषित बच्चे अधिक बीमार हो रहे हैं। एक महीने में एनआरसी में इलाज के लिए 75 बच्चे भर्ती हुए हैं। इनमें सबसे अधिक डायरिया और निमोनिया के शिकार हो रहे हैं। चिकित्सक कुपोषित बच्चों का अधिक ध्यान रखने की सलाह दे रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के भोजन के प्रति लापरवाही और जागरुकता की कमी से बच्चे कुपोषित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को कुपोषण के खिलाफ जागरूक किया जा रहा है, इसके बावजूद लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। जिले में अधिकांश कुपोषित बच्चे खांसी-जुकाम, निमोनिया और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए जिला अस्पताल की एनआरसी में दस बेड का वार्ड बनाया गया है।
- निमोनिया और डायरिया के हो रहे शिकार
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सत्यप्रकाश का कहना है कि बार-बार निमाेनिया और डायरिया होना, हृदय कमजोर होना, ब्रेन का सही विकास न होना, संक्रमण, पीलिया के कारण बच्चे कुपोषित हो जाते हैं। इसके अलावा जागरुकता की कमी के कारण भी कुपोषण बढ़ता है। बच्चों को छह महीने के बाद भी दूध ही पिलाते रहते हैं, जिससे बच्चे का पूरा विकास नहीं हो पाता है। एनआरसी में भर्ती होने वाले अधिकतर बच्चे निमोनिया और डायरिया के मरीज हैं।
- कुपोषण के लक्षण
- जन्म के समय बच्चे का वजन कम होना
- बच्चे में चिड़चिड़ापन और सुस्ती रहना
- बार-बार बीमारियों की चपेट में आना
- बच्चे में उम्र के साथ वजन न बढ़ना
- बच्चे का खाना न पचना
- वर्जन- गर्मी में एनआरसी में कुपोषित बच्चे बढ़ रहे हैं। मई में एनआरसी में 75 बच्चे भर्ती हुए हैं। चिकित्सक और स्टॉफ को बच्चों की निगरानी और समय पर इलाज के निर्देश दिए गए हैं। - डॉ. एसके चौधरी, सीएमएस