दशलक्षण महापर्व का पांचवां दिन
श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर उत्तम सत्य को अंगीकार किया
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर उत्तम सत्य को अंगीकार किया। दिगंबर जैन बड़ा मंदिर में कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए सर्वप्रथम श्रीजी का प्रकक्षालन और अभिषेक किया गया। 13 द्वीप की सादगी पूर्वक पूजा की गई और अर्घ्य चढ़ाए गए। इस दौरान प्रवीण जैन अतुल जैन, नवीन जैन, सुखमाल जैन को मिला।
उत्तम सत्य धर्म को अंगीकार किया
बड़ौत। श्री पार्श्वनाथ मंदिर नेहरू रोड में भी सादगी पूर्वक दशलक्षण महापर्व के पांचवें दिन उत्तम सत्य धर्म को अंगीकार किया गया। दशलक्षण धर्म की आठ पूजा की गई। इस अवसर पर सतेंद्र जैन, अमन जैन, अमित जैन, आदिश जैन मौजूद रहे।
सत्य परेशान हो सकता है पराजित नहीं
बड़ौत। पंडित डॉ. श्रेयांश जैन ने कहा कि सत्यता ही पवित्रता है, सत्य हर धर्म का सार जिंदगी का सार है। सत्य ही जीवन की परम कसौटी है। मैंने झूठ बोलकर दूसरों को धोखा दिया है, पर सिद्धांत कहता है तूने दूसरों को धोखा नहीं, स्वयं के लिए धोखा दिया है। दूसरों को धोखा देना स्वयं के साथ छलावा है। झूठ या असत्य बहुत सारे पापों का जनक है। एक असत्य को छुपाने के लिए व्यक्ति कई असत्य बोलता है, पर ऐसा कभी नहीं हुआ कि अग्नि को रूई में छिपा लिया जाए, वह तो प्रकट होगी ही। इसी प्रकार असत्य को कितना ही ढक लें, वह प्रकट हुए बिना नहीं रह सकता। सत्य को छिपाया नहीं जाता, दिखाया नहीं जाता, वह तो स्वयं दिव्य-ज्योतिर्मय सूर्य है। कितने ही असत्य रूपी बादल छा जाए, सूर्य को ढक लें, पर आज तक बादलों द्वारा सूर्य का विनाश नहीं हो पाया। सत्य ही परम धर्म है ।