साल 1959 के नागपुर अधिवेशन में किया था सहकारी खेती का विरोध
इमरजेंसी के बाद चौधरी साहब छपरौली पहुंचे तो जुट गए लाखों किसान
बागपत। पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की बातें और यादें आज भी लोगों के जेहन में हैं। छपरौली उनकी कर्मभूमि रही। वर्ष 1959 में कांग्रेस का नागपुर में अधिवेशन हुआ था। प्रत्येक वक्ता को 15 मिनट में अपनी बात रखनी थी, लेकिन जब सहकारी खेती के विरोध पर चौधरी चरण सिंह बोलने शुरू हुए थे, सबने चुप होकर सुना। एक घंटा 57 मिनट तक उनकी स्पीच चली थी और कांग्रेस के बड़े नेताओं ने गांव, गरीब, सहकारी खेती को लेकर उनके विचार सुने थे। उन्होंने सहकारी खेती का विरोध किया था।
मवी कलां के समाजसेवी और चौधरी साहब के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे धर्मपाल सिंह आर्य ने बताया इमरजेंसी के बाद चौधरी साहब जब पैरोल पर जेल से बाहर आए तो जिले से जयपाल सिंह नौरोजपुर, जगदीश बरवाला, रणधीर राणा और रामनारायण ढिकाना के साथ चौधरी साहब से मिलने दिल्ली गए थे। चौधरी साहब से एक रैली करने का अनुरोध किया। इस पर चौधरी साहब ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि लोग डरे और सहमे हुए हैं और आप रैली की बात करते हैं। प्रतिनिधि मंडल ने जिद की तो वह सहमत हो गए। पांच जनवरी 1977 को छपरौली में रैली का ऐलान हो गया, उस समय लोकतंत्र पूर्णत: समाप्त था, प्रचार के लिए वाहन नहीं थे। व्यक्तिगत वाहनों से किसी तरह प्रचार करने वालों को प्रताड़ना झेलनी पड़ती थी। पुलिस ने उनकी गाड़ी की भी बैटरी उतार ली थी। बड़ौत में दिल्ली अड्डे पर बैटरी की दुकान चलाने वाले इंद्रजीत सिंह रात में गाड़ी पर बैटरी रख देते थे, वह भी नि:शुल्क। पुलिस-प्रशासन से मुकाबला कर रैली का आयोजन कराया। देश में यह पहला उदाहरण था जब इमरजेंसी के चलते हुए लाखों की संख्या में छपरौली में किसान एकत्र हुए थे।
धनौरा सिल्वर नगर के सत्यवीर सिंह ने बताया जिले में चकबंदी प्रक्रिया चल रही थी, अधिकारियों से परेशान होकर उनके दादा स्वतंत्रता सेनानी महाशय सिंह चौधरी साहब से मिले, तत्काल चकबंदी प्रक्रिया पूरा कराकर हमारा चक एक जगह कराया था।
मास्टर विजयपाल ने बताया कि जिस समय चौधरी साहब प्रदेश के कृषि मंत्री बने थे, उसी समय कस्बे में स्थित डीएवी इंटर कॉलेज को सबसे पहली एड दिलाई थी। उन्होंने किसानों को खेती के साथ-साथ बच्चों को पढ़ाई के लिए भी प्रेरित किया था
सम्मेलन खत्म होने से पहले हटवा दी थी पुलिस चौकी
बड़ौत। किसान रणधीर ढिक़ाना ने बताया वर्ष 1977 में चौधरी साहब छपरौली में आर्य समाज सम्मेलन में आए थे। ढिक़ाना गांव में पुलिस चौकी बनाई । जैसे ही सम्मेलन में चौधरी साहब के समक्ष पहुंचकर जानकारी दी तो उन्होंने तत्कालीन एसएसपी जैनूद्दीन को वहां से पुलिस चौकी हटाने के लिए निर्देश दिए। सम्मेलन खत्म होने से पहले ही वहां से पुलिस चौकी हटा दी थी।
चौधरी साहब को बहुत पसंद थी खीर
अग्रवाल मंडी टटीरी। कस्बे के पूर्व चेयरमैन संतोष देवी के पति सेवा निवृत्त शिक्षक विजयपाल चौधरी ने बताया सन 1955 में चौधरी चरण सिंह उनके घर पर आए थे, उन्होंने खीर खाई।
उठाया था हाईकोर्ट बैंच का मुद्दा
बागपत।अधिवक्ता देवेंद्र आर्य ने बताया वर्ष 1981 में बागपत के अधिवक्ताओं का प्रतिनिधिमंडल चौधरी साहब के दिल्ली स्थित आवास पर मिला और हाईकोर्ट बैंच के लिए समर्थन मांगा। इस पर बड़े चौधरी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर जनता की मांग न्यायोचित ठहराया था। इस पत्र की प्रतिलिपि बड़े चौधरी ने हाईकोर्ट बैंच की संघर्ष समिति मेरठ को भी भेजी थी।