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Baghpat News: सर्किल रेट बढ़ने पर जमीन देंगे किसान, अधिकारियों के सामने हुई खींचतान

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खेकड़ा तहसील में भूमि अ​धिकरण की बैठक के दौरान हंगामा कर रहे किसानों को समझाते यूपीसीडा विभाग क
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खेकड़ा। नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए 12 गांवों में चिह्नित जमीन के अधिग्रहण को लेकर शुक्रवार को तहसील में किसानों और अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें सर्किल रेट को लेकर खींचतान होती रही। ढाई घंटे तक चली बैठक बेनतीजा रही और किसान सर्किल रेट बढ़ाकर 40 लाख रुपये प्रति बीघा करने और चार गुना मुआवजा देने की मांग पर अड़ गए। साथ ही नोएडा की तर्ज पर 10 फीसदी विकसित प्लॉट, सभी को एक समान मुआवजा व एक सदस्य को नौकरी देने की भी मांग उठाई।
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नए औद्योगिक क्षेत्र के लिए सरफाबाद, गोना, गढ़ी कलंजरी, भागोट, नवादा, फुलेरा व लहचौड़ा समेत 12 गांवों के जंगल में दो हजार हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। शासन ने जमीन का अधिग्रहण करने के लिए सर्किल रेट बढ़ाने और बैनामों पर भी रोक लगा दी है, जबकि किसान सर्किल रेट बढ़ाने की मांग पर अड़े हुए हैं। शुक्रवार को तहसील के सभागार में 12 गांवों के प्रधानों, किसानों के साथ अधिकारियों की बैठक हुई।
बैठक में भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष प्रताप गुर्जर ने कहा कि जमीन के सर्किल रेट अलग-अलग हैं, जो एक समान होने चाहिए। सरकार जो सुविधाएं उद्योगपतियों को दे रही है, वे सुविधाएं किसानों को भी मिलनी चाहिए। किसानों को रेट बताए बिना जमीन का अधिग्रहण नहीं होने दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि किसानों के पास जमीन और रोजगार नहीं बचेगा तो उन्हें गांव छोड़कर जाना पड़ेगा। वहां बागपत चीनी मिल समिति के उपाध्यक्ष कृष्णपाल सिंह ने भी सर्किल रेट बढ़ाने की मांग की। बैठक में एसडीएम मनीष यादव, तहसीलदार वर्तिका श्रीवास्तव, पूर्व ब्लॉक प्रमुख लीलू पहलवान, प्रवीण प्रधान, देवेंद्र कुमार, बिजेंद्र सिंह, रविंद्र कुमार समेत अन्य मौजूद रहे।
ढाई घंटे तक जमीन अधिग्रहण के नियम समझाते रहे अधिकारी
बैठक में यूपीसीडा के अध्याप्ति एडीएम उमेश चंद शुक्ला ने किसानों को काफी समझाने का प्रयास भी किया। उन्होंने कहा कि 70 फीसदी किसानों की सहमति मिलने के बाद ही जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस दौरान उन्होंने अन्य प्रक्रिया के बारे में भी ढाई घंटे तक बीच-बीच में बताया, लेकिन किसान नहीं माने।
अधिकारी बोले, यहां से चला जाएगा प्रोजेक्ट

अध्याप्ति एडीएम उमेश चंद शुक्ला ने कहा कि पिछले साल ही सर्किल रेट बढ़ाया गया है, जो अब दोबारा नहीं बढ़ाया जा सकता। औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने से यहां विकास होगा और लोगों को रोजगार मिलेंगे लेकिन किसान अपनी चार मांगों पर अड़े रहे। इस पर उन्होंने कहा कि किसानों ने जमीन देने के लिए सहमति नहीं दी तो प्रोजेक्ट यहां से दूसरी जगह चला जाएगा। इस पर किसानों ने तालियां बजानी शुरू कर दीं।
वर्जन
किसानों ने चार मांगें रखी हैं, जिससे उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। सभी किसानों को एक समान मुआवजा नहीं दिया जा सकता क्योंकि किसी की जमीन सड़क पर है तो किसी की जमीन पीछे है। इससे किसानों में ही मतभेद हो जाएंगे। किसानों के परिवार के एक सदस्य को रोजगार दिलाने का प्रयास किया जाएगा। उच्चाधिकारी जो भी निर्णय लेंगे, उसी के अनुसार नए औद्योगिक क्षेत्र की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। जल्द ही किसानों के साथ दोबारा बैठक की जाएगी।
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-उमेश चंद शुक्ला, अध्याप्ति एडीएम, यूपीसीडा कानपुर
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