जनपद में पहले भी कई बार हो चुके है पुलिस कर्मी लाइन हाजिर
आए दिन पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के खंड संचालक श्रीनिवास के बेटे अक्षय के सुसाइड के बाद जनपद में पुलिस की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा में आ गई है। पुलिस की लापरवाही पर एक तरफ जहां खाकी की किरकिरी हो रही है, वहीं अब उच्चाधिकारियों के लिए भी मुसीबत बढ़ गई है। जनपद में पुलिस की कार्यशैली व खराब रवैये का यह पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी कई बार पुलिस कर्मी लाइन हाजिर हो चुके हैं।
केस नंबर एक : 23 अक्टूबर 2019 को लुहारी गांव में गोवंश के अवशेष मिलने के ग्रामीणों ने पुलिस पर मिलीभगत कराते हुए गोकशी का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया था। बोहला पुलिस चौकी पर तैनात कर्मियों पर कार्रवाई करने की मांग की थी। तत्कालीन एसपी प्रताप गोपेंद्र ने दो दरोगा, एक हेड कांस्टेबल और तीन सिपाहियों को सस्पेंड कर दिया था।
केस नंबर दो : दो अप्रैल 2020 में पुलिस चौकी डूंडाहेडा पर अवैध वसूली की शिकायत पर तत्कालीन एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव ने शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए गोपनीय रूप से जांच कराई। इसमें चौकी डूंडाहेड़ा पर नियुक्त कांस्टेबल हेमंत व कांस्टेबल बबलू को वाहन चालकों से अवैध वसूली करने में संलिप्त पाए जाने पर निलंबित किया गया। चौकी इंचार्ज उप निरीक्षक प्रदीप शर्मा व उप निरीक्षक रिछपाल एवं हेड कांस्टेबल वीरेश की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर इन्हें तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया था।
केस नंबर तीन : अगस्त 2020 को गुराना रोड पर पहले रक्षाबंधन पर सांप्रदायिक झगड़े और इसके बाद गांजा तस्करों के खिलाफ हंगामे ने तूल पकड़ लिया था। लोगों ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अपने घरों के बाहर पलायन के पोस्टर चस्पा कर दिए थे। यह मामला लखनऊ तक गूंजा था। तत्कालीन एसपी अजय कुमार सिंह ने बड़ौत की बस स्टैंड चौकी प्रभारी कन्छिद सिंह, सिपाही महेश और रामबख्श को लाइन हाजिर कर दिया था।
पुलिस विभाग के एक-एक अधिकारी व कर्मचारी को साफ तौर पर निर्देश दिए गए है कि किसी के साथ गलत व्यवहार न करें। बिना पक्षपात फरियादियों की शिकायतों का तत्काल निस्तारण हो। यदि निर्देश के बाद भी कोई पुलिस कर्मी लापरवाही करता है तो विभागीय कार्रवाई निश्चित है। किसी भी कीमत पर जनता से गलत व्यवहार बर्दाश्त नहीं होगा। - मनीष मिश्र, एएसपी।