फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वर्चुअल रैली से टूटी टेंट, चुनाव सामग्री व डीजे साउंड कारोबार को झटका

विज्ञापन
चुनाव संचालन केंद्र पर पोलिंग पार्टिया रवाना करने के लिए लगाया जा रहा पंडाल - फोटो : KAHKRA
विज्ञापन
2017 के विधान सभा चुनाव में हुआ था चार करोड़ से अधिक का कारोबार
विज्ञापन

110 से अधिक टेंट और 50 से अधिक है डीजे साउंड कारोबारी जनपद में
02 साल से कोरोना की मार झेल रहे कारोबारियों ने चुनाव के कारण पहले ही कर ली थी तैयारी
07 से आठ करोड़ की चुनाव से संबंधी खरीदी थी सामग्री, सता रहा खराब होने का डर
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत। कोरोना की मार झेल रहे व्यापारी वर्ग को चुनाव में भी मायूसी हाथ लगी है। चुनावों में रोड शो, रैली, बड़ी चुनावी सभाओं पर रोक लगने के बाद टेंट, चुनाव सामग्री व साउंड कारोबारियों को झटका लगा है। जिले में छोटे-बड़े मिलाकर 110 टेंट और 50 से अधिक डीजे साउंड कारोबारी हैं। इन कारोबारियों पर दोहरी मार पड़ रही है। एक तो इस बार प्रतिबंध के चलते कारोबार सिमट का पांच से दस फीसदी ही रह गया है, ऊपर से खरीदी गई चुनाव सामग्री के खराब होने की आशंका बढ़ी गई है। कारोबारियों का कहना है कि पिछले चुनावों में करीब चार करोड़ रुपये का व्यापार हुआ था, जो इस साल 10 फीसदी से भी कम पर सिमट कर रह गया है।
2017 में करीब तीन करोड़ का व्यापार हुआ
न्यू टेंट हाउस से प्रदीप कुमार बब्बल ने बताया कि जिले में करीब 110 टेंट कारोबारी हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में तीन विधानसभा को मिलाकर करीब 1.5 करोड़ का व्यापार हुआ था। टेंट के अलावा कुर्सी, मेज, एलईडी स्क्रीन, फर्श, वीआईपी सोफे आदि सभी चीजों की व्यवस्था होती है। अब वर्चुअल रैली और सभा के चलते काम न के बराबर है। 5 से 10 फीसदी से भी कम काम बचा है। ऐसे में कारोबारियों ने जो पहले से तैयारियां कर रखी थी, वो भी बेकार हैं।
विज्ञापन

जर्मन पंडाल बढ़ाते थे पीएम-सीएम की शोभा
जैन टेंट हाउस से राहुल जैन ने बताया कि विधानसभा चुनाव 2017 में जर्मन पंडाल सीएम और पीएम की रैलियों में लगता था। इसका रेट लगभग 70 रुपये वर्ग फुट है। बड़ी चुनावी सभाओं में ये पंडाल लगाए जाते थे। करीब 8 से 10 लाख रुपये का खर्चा होता था। इससे अच्छी कमाई हो जाती थी। यह पंडाल वाटर प्रूफ होता है। बताया कि चुनाव को देखते हुए पहले ही जनपद के टेंट, चुनाव सामग्री व डीजे साउंड कारोबारियों ने पाइप, कुर्सियां, साउंड सिस्टम, स्टेज, कारपेट सहित अन्य सात से आठ करोड़ की चुनाव संबंधी सामग्री खरीद ली थी, लेकिन व्यापारियों को नहीं पता था कि उन पर अब दोहरी मार पडे़गी।
वर्चुअल प्रचार ने ठप किया कारोबार
बड़ौत टेंट व्यापारी एसोसिएशन के सदस्य प्रदीप ने बताया कि पिछले चुनाव में जिले में एक दर्जन के लगभग बड़ी रैली व चुनावी सभाएं होती थीं। इससे व्यापारियों को अच्छा काम मिल जाता था। प्रत्येक व्यापारी लगभग 5 से 10 लाख रुपये का काम तो कर ही लेता था। व्यापारियों ने इस साल चुनाव के चलते पहले से ही तैयारियां कर रखी थीं, लेकिन वर्चुअल प्रचार ने पूरा कारोबार ठप कर दिया।
डीजे साउंड के काम को भी झटका लगा
वरुण अग्रवाल ने बताया कि विधानसभा चुनावों में अच्छा खासा काम मिल जाता था। करीब 50 से अधिक डीजे साउंड कारोबारी जिले में हैं। रैली, रोड शो, चुनावी सभाओं व प्रचार-प्रसार में काम मिलता था, जो इस साल खत्म हो गया है। पहले से ही कोरोना के चलते शादी विवाह में भी काम कम था। चुनावों से उम्मीद थी। उसने भी झटका दे दिया। 10 प्रतिशत काम बचा है।
विज्ञापन

चुनाव प्रचार सामग्री का कारोबार भी पड़ा है ठंडा
नेहरू रोड स्थित अग्रवाल इंटरप्राइज के मालिक अंकित अग्रवाल ने बताया कि चुनाव आयोग की सख्ती के चलते इस बार चुनाव प्रचार सामग्री का कारोबार पूरी तरह से चौपट हो गया है। जनपद में 60 से 70 दुकानें है, कारोबार मात्र पांच से दस फीसदी तक रह गया है। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में 2 से ढाई करोड़ कारोबार हो गया था।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें