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यमुना खादर की 750 बीघा जमीन के लिए बड़ा खेल

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बागपत कलक्ट्रेट - फोटो : BAGHPAT
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हरियाणा की तरफ गई 750 बीघा जमीन को फैजपुर निनाना के 25 किसानों के नाम कराने की सर्वे विभाग ने भेज दी रिपोर्ट
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वर्ष 2015 में चकबंदी के बाद सर्वे विभाग से बाहर हो गई थी जमीन, फिर भी 2018 में रिपोर्ट भेजकर अब कर दी सत्यापित
फैजपुर निनाना के प्रधान ने पता चलने पर आपत्ति लगाते हुए ग्रामीणों के नाम जमीन कराने को फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया
एडीएम ने शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू कराई, कहा इस मामले में लिप्त अधिकारियों व कर्मियों पर कार्रवाई होगी
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। यमुना खादर की जमीन को लेकर अभी तक हरियाणा और यूपी के किसानों में संघर्ष होता था। मगर, अब यमुना खादर में चकबंदी के बाद बची हुई 750 बीघा जमीन के लिए खेल शुरू हो गए है। यह जमीन हरियाणा की तरफ गई हुई है। बागपत के फैजपुर निनाना गांव के करीब 25 किसानों के नाम इस जमीन को कराने के लिए खेल किया गया है। इन किसानों के नाम किसी रिकार्ड में भी नहीं है। इस खेल में सरकारी अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल है। शिकायत होने पर एडीएम ने मामले में जांच शुरू करा दी है। इसके बाद साफ होगा कि आखिर इस खेल में कौन-कौन शामिल है।
फैजपुर निनाना गांव में वर्ष 2015 में चकबंदी हुई थी। इसके बाद गांव को सर्वे विभाग से बाहर कर दिया गया था और वह राजस्व विभाग के अंतर्गत आ गया था। इसकी अधिसूचना भी जारी हो गई थी और उससे संबंधित फाइलों को तहसील में भेज दिया गया था। चकबंदी में फैजपुर निनाना गांव में यमुना खादर की करीब 750 बीघा जमीन बच गई थी, जो हरियाणा की तरफ गई हुई है। वर्ष 2015 में चकबंदी के बाद इस बची हुई जमीन को लेकर प्रशासन ने कहा था कि अगर किसी किसान को जमीन नहीं मिली है तो वह अपना दावा पेश कर सकता है। इसकी जांच के बाद जमीन देने की कार्रवाई की जाएगी। उस वक्त कोई सामने नहीं आया, लेकिन इस जमीन के लिए ही वर्ष 2018 में खेल शुरू हुआ।
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एडीएम अमित कुमार को बताया गया कि वर्ष 2018 में सर्वे विभाग की ओर से फैजपुर निनाना गांव के 25 से ज्यादा किसानों के नाम के साथ एक रिपोर्ट बनाकर हरियाणा प्रशासन को भेजी गई। इसमें कहा गया कि चकबंदी के बाद बची हुई 750 बीघा जमीन इन किसानों को मिलनी चाहिए। जमीन को इन किसानों के नाम कर दिया जाए। जबकि पुराने रिकार्ड में उनका कोई नाम ही नहीं था। उस वक्त यह मामला उजागर नहीं हो सका। मगर, अब जमीन फैजपुर निनाना गांव के 25 किसानों के नाम चढ़ाने के लिए सोनीपत प्रशासन ने बागपत से रिपोर्ट को सत्यापित कराने के लिए पत्र भेजा। इसमें भी खेल करते हुए सर्वे विभाग के अधिकारियों और कर्मियों ने रिपोर्ट भी सत्यापित करके भेज दी। इसके बाद प्रधान प्रीति धनकड़ की जानकारी में यह मामला आया तो इसका खुलासा हो गया। प्रधान ने इस पर तुरंत ही सोनीपत प्रशासन के पास इसे लेकर आपत्ति दर्ज कराई। इसके साथ ही प्रधान, उनके रोहित धनकड़, नरेश प्रधान आदि ने एडीएम के पास शिकायत की। एडीएम अमित कुमार ने जांच शुरू करा दी है कि आखिर यह खेल कैसे हुआ है। इसकी जांच होते ही पूरा मामला साफ हो जाएगा।
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1960 व 1987 तक के रिकार्ड में किसी का नाम नहीं मिला
एडीएम को सौंपी शिकायत में रोहित धनकड़ ने बताया कि सर्वे विभाग ने जिनके नाम सत्यापित करके भेजे है, उनके नाम 2018 से पहले तक रिकार्ड में नहीं थे। 1960 का रिकार्ड देखा गया तो उसमें भी नाम नहीं मिले। फिर 1987 का रिकार्ड देखा गया तो उसमें भी नाम नहीं मिले। वर्ष 2015 में चकबंदी हुई, तब भी नाम नहीं मिले। इस तरह से अचानक उनके नाम सोनीपत प्रशासन को भेज दिए गए। इस तरह से यह पूरा खेल सामने आया है।
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यमुना खादर की करीब 750 बीघा जमीन फर्जी तरीके से अपने नाम कराने के लिए रिपोर्ट सोनीपत प्रशासन को भेजने की शिकायत मिली है। उसकी जांच कराई जा रही है और उसमें संलिप्त मिलने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - अमित कुमार, एडीएम
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