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26 को छूटेगा खाकी और ‘थ्री नॉट थ्री’ का साथ

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26 को छूटेगा खाकी और ‘थ्री नॉट थ्री’ का साथ
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बागपत। खाकी और ‘थ्री नॉट थ्री’ रायफल अब एक-दूसरे की हमराह नहीं होंगी। इस बार गणतंत्र दिवस पर आखिरी बार पुलिस अपनी इस पुरानी रायफल के साथ परेड करेगी, इसके बाद इसे अलविदा कह दिया जाएगा। पुलिसकर्मी एसएलआर और इंसास के साथ ड्यूटी करते नजर आएंगे।
उत्तर प्रदेश पुलिस और ‘थ्री नॉट थ्री’ रायफल का साथ सालों पुराना हैं। खाकी का इकबाल बुलंद करने में खास भूमिका निभाने वाले ‘थ्री नॉट थ्री’ अब बीते जमाने की बात हो जाएगी। बदमाशों से खुद को बचाना हो या फिर कारागार से कोर्ट तक बंदियों की पेशी, हर मामले में थ्री नॉट थ्री रायफल पुलिस के हाथों में दिखी।
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मुठभेड़ में उगलती रही शोले
जिले में पिछले सालों में हुई मुठभेड़ में इसकी खास भूमिका रही। छपरौली थानाध्यक्ष दिनेश चिकारा का कहना है कि बेशक हाईटेक क्राइम के दौर में अब पुलिस के जवानों को इंसास और एसएलआर जैसे आधुनिक हथियार मिलने लगे हों। लेकिन पुराने समय में थ्री नॉट थ्री का अपना जलवा रहा है। यह रायफल पुलिस महकमे को लंबे समय तक याद रहेगी।
इंसास बनने लगी हमराह
बिनौली थाना प्रभारी रवेंद्र यादव का कहना है कि अधिकतर एनकाउंटर के समय पुलिस के पास इंसास के साथ ही थ्री नॉट थ्री रायफल भी रही है। कई मौकों पर इसका इस्तेमाल हुआ है।
अपराधी हाईटेक, बदलाव जरूरी
चांदीनगर थाना प्रभारी एमपी सिंह का कहना है कि अब अपराधी हाईटेक हो गए हैं। उनके पास ऑटोमेटिक हथियार होते हैं। इसलिए समय के साथ नए हथियारों की जरूरत बढ़ गई है।
क्या रही दिक्कत, क्या हुआ बदलाव
सिपाहियों का कहना है कि थ्री नॉट थ्री रायफल की मारक क्षमता तो दो किमी तक की है। लेकिन दिक्कत इसकी लंबाई और वजन को लेकर है। इसे लोड करने, चलाने से लेकर मेंटेनेंस तक में काफी परेशानी होती है। इसलिए इसके विकल्प ढूंढने पड़े। थ्री नॉट थ्री करीब 44.5 इंच लंबी होती है। इसमें बैरल की लंबाई करीब 25 इंच होती है। इसकी जगह अब इंसास लेगी। इंसास की लंबाई करीब 37.8 इंच और बैरल की लंबाई 18.3 इंच होती है। इसकी मारक क्षमता करीब 400 मीटर होती है।
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वर्जन
- थ्री नॉट थ्री 26 जनवरी को आखिरी बार परेड में दिखेगी। थानों में बदलाव की प्रक्रिया चल रही है। जहां पुरानी राइफल बची हैं, वहां भी अब इंसास दी जा रही है।
प्रताप गोपेंद्र यादव, एसपी बागपत
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