- कांवड़ पेज के लिए
- मोबाइल की कैद से बचपन को मुक्ति दिलाने के लिए लाए 10 इंच की कांवड़
- सोनीपत के खांडा गांव के दो सगे भाइयों ने बच्चों को मोबाइल से मुक्ति के लिए मांगी मन्नत
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ौत (बागपत)। सोनीपत के खांडा गांव के दो सगे भाइयों विजय और वीरेंद्र की कांवड़ इस बार आस्था के साथ एक अपील लेकर आई। बचपन को मोबाइल की कैद से मुक्त कराने की। महज 10 इंच की इस सबसे छोटी कांवड़ ने शिवभक्ति को सामाजिक संदेश में बदल दिया।
दोनों भाइयों ने बताया कि उन्होंने काफी बच्चों को मोबाइल की लत लगते हुए देखी है। किसी की आंखों की रोशनी जा रही है तो कहीं मानसिक तनाव बच्चों को निगल रहा है। कुछ मामलों में तो बच्चों की जान तक चली गई। कांवडि़या विजय ने कहा कि हमने देखा कि बच्चे अब मैदान में नहीं, मोबाइल की स्क्रीन में खो गए हैं। न खेल, न कहानियां, न परिवार से संवाद। तभी हमने तय किया कि इस बार कांवड़ के जरिए अभिभावकों तक संदेश पहुंचाएंगे।
- कांवड़ में थे गहरे प्रतीक
उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सबसे छोटी कांवड़ में दो शिवलिंग, डमरू और भस्म, दो गंगाजल केन के अलावा एक छोटा चश्मा जो कमजोर होती आंखों की चेतावनी, जलती कृत्रिम लौ जो बुझती मासूमियत और एक खिलौने जैसा मोबाइल जो बच्चों की कैद का प्रतीक था। लोगों ने जब खिलौना मोबाइल देखा तो चौंक गए। भाइयों ने समझाया ये मोबाइल नहीं, जंजीर है, जिसमें बचपन कैद है।
- कांवड़ के जरिए सभी माता-पिता से की अपील
बचपन लौटाइए... मोबाइल हटाइए। बच्चों को फिर से मिट्टी, मैदान और मस्ती में लौटाइए। यही सच्चा उपवास है, यही सच्ची भक्ति। इस संदेश को देते हुए दोनों भाई आगे बढ़ते गए।