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भाकियू ने बजाया रणसिंघा, किसानों की नब्ज टटोलने लगे सियासी दल

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- कृषि विधेयक के मुद्दे पर आने वाले दिनों में और अधिक गरमाएगी सियासत
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- पंचायत चुनाव और इसके बाद विधानसभा चुनाव में जमीन पाने की जद्दोजहद
मदन बालियान
बागपत। कृषि विधेयकों के मुद्दे पर भाकियू कार्यकर्ताओं ने चक्का जाम कर सरकार के विरोध का रणसिंघा बजा दिया है। शुरूआत हुई तो राजनीतिक दलों ने भी किसानों की नब्ज टटोलनी शुरू कर दी है। कांग्रेस समर्थन में उतरी। सपा ने विरोध जताया और रालोद ने धरने प्रदर्शन का एलान किया। सियासी दल किसानों की नब्ज टटोल रहे हैं। मुद्दा भले ही कृषि विधेयक हो, लेकिन वजह पंचायत चुनाव भी हैं।
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लंबे समय बाद भाजपा सरकार के विरोध में किसान सड़कों पर उतरे हैं। भाव और भुगतान के मुद्दे पर किसान चुप्पी साधे रहे। गेहूं क्रय केंद्रों की मुश्किलों और धान के दाम पर विरोध नहीं हुआ। घाटा झेल रहे किसानों ने कोरोना काल में हिम्मत बनाए रखीं। लेकिन कृषि विधेयक के मुद्दे पर विरोध के स्वर तीखे होने लगे हैं। पश्चिम उत्तर प्रदेश में भाकियू ने चक्का जाम कर विरोध किया। किसानों की पीड़ा का समाधान निकालने के बहाने अब सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस ने भाकियू को समर्थन दिया। जिले में रालोद का शनिवार को धरना प्रदर्शन हैं। सपा कार्यकर्ताओं ने विधेयक के विरोध में एडीएम को ज्ञापन सौंपा। जाहिर है कि सियासी दल अब किसानों की नब्ज टटोल रहे हैं। विधेयक पास होने के बाद भाजपा कार्यकर्ता जिले के किसानों को लेकर पहले ही कृषि मंत्री के पास पहुंच चुके हैं। खेती और किसान के मुद्दे पर पंचायत चुनाव और इसके बाद के विधानसभा चुनाव का सियासी चक्रव्यूह रचने की तैयारी चल रही है। अगले साल की शुरूआत में ही पंचायत चुनाव होंगे।
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