वायरस से परिवार के सदस्यों में बढ़ रही हैं दूरियां
चिकित्सकों के पास तरह-तरह के मामले पहुंच रहे
बड़ौत। कोरोना वायरस को लेकर लोगों के दिमाग पर फोबिया हावी हो रहा है। फोबिया की वजह से लोगों के स्वभाव में भी बदलाव आया है। घर के बाहर जाने वाले परिजन का तो कमरा ही अलग कर दिया गया है। इतना ही नहीं व्यक्ति को खांसी होते ही कोरोना समझा जा रहा है। अमर उजाला ने बुधवार को नगर के कुछ चिकित्सकों से बात करके जनता को जागरूक रहने और संक्रमण से न डरने की सलाह दी।
- डा अनिल जैन का कहना है कि इस तरह के तमाम केस रोज पहुंच रहे हैं। बताते है कि पहले से स्वास्थ्य संबंधी घबराहट महसूस करने वाले लोगों में इस बीमारी को लेकर ज्यादा चिंताएं हैं।
- डा मनीष तोमर का कहना है कि कोरोना के चलते कुछ लोग बहुत ज्यादा साफ-सफाई का ध्यान देने लगे हैं। उनके मन में यह बीमारी होने की आशंका हर समय बनी रहती है।
- सीएचसी अधीक्षक डा विजय कुमार का कहना है कि पहले से ही स्वस्थ्य संबंधी घबराहट महसूस करने वाले लोगों में कोरोना को लेकर बेवजह का डर बना हुआ है। इस बीमारी से सिर्फ सतर्क रहने की जरूरत है, डरने की नहीं।
खांसी हुई तो कमरें में हो गए कैद
केस नंबर-1- नगर की पटटी चौधरान निवासी 27 वर्षीय व्यक्ति को हल्की सी खांसी हुई तो उन्हें लगा कि कोरोना हो गया है। उन्होंने खुद को अलग कमरे में कैद कर लिया। डॉक्टर से बातचीत की तो उन्होंने कुछ दवाएं खाने को कहीं। एक ही दिन में उनकी खांसी दूर हो गई। डॉक्टर ने जब उनसे खानपान के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि रात में फ्रिज से निकला ठंडा दही खा लिया था। डॉक्टर ने उन्हें समझाया कि इसी वजह से खांसी हो गई होगी। बेवजह डरने की जरूरत नहीं है।
फोबिया के कारण बार बार नहाना शुरू
केस नंबर 2- जौनमाना निवासी युवक पर कोरोना का फोबिया इस कदर हावी हुआ कि वह जितनी बाहर से घर आता, उतनी बार नहाता। यही नहीं, परिवार के भी जो लोग बाहर से आते उन्हें भी नहलाता है। आलम यह हुआ कि वह अलग रूम में रहने लगा और बर्तन भी स्वयं धोने लगा। बच्चों से दूर रहने लगा। उसे डर रहता है कि कहीं वह और परिजन कोरोना की चपेट में न आ आएं।