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आर्थिक तंगी और बीमारी से जूझ रही माया की मदद को बढ़ेंगे हाथ

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- 42 वर्ष पूर्व बागपत नगर में हुआ था माया त्यागी कांड
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- माया के पति सहित तीन की पुलिस कर्मियों ने कर दी थी हत्या
- आज माया गरीबी और बीमारियों से जूझ रही है, ओमवीर सहित कई माया से मिले
संवाद न्यूज एजेंसी
बागपत। माया त्यागी कांड ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया था और प्रदेश से लेकर देश की राजधानी तक को हिला दिया था। आज वहीं माया त्यागी गरीबी और बीमारी से जूझ रही है। सपा नेता एवं माया त्यागी कांड के बाद आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले ओमवीर तोमर ने भारत कृषक समाज के अध्यक्ष डॉ कृष्णवीर सिंह व भाजपा नेता हातम सिंह नागर के साथ गाजियाबाद में माया के घर पहुंचकर मुलाकात की। उन्होंने कहा कि साथियों से धन एकत्रित करके माया की मदद की जाएगी।
माया त्यागी गाजियाबाद में रहती है। उन्होंने माया से बातचीत की और हाल जाना। ओमवीर तोमर ने बताया कि माया त्यागी की आर्थिक स्थिति इन दिनों बेहद खराब है। वह गरीबी से जूझ रही है। बीमारियों से भी जूझ रही है। उनकी हालत सही नहीं चल रही है। माया को कहीं से आर्थिक मदद भी नहीं मिली। उन्हें पता चला था कि माया की स्थिति ठीक नहीं है। इसके बाद वह साथियों के साथ मिलने गए थे। माया की मदद के लिए साथियों से धन एकत्रित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक मदद करने का प्रयास किया जाएगा। बताया कि कृष्णवीर सिंह उस घटनाक्रम पर एक फिल्म बनाने पर भी विचार कर रहे है। उन्होंने कहा कि माया की मदद के लिए अन्य लोगों से भी संपर्क किया जाएगा।
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यह था माया त्यागी कांड
18 जून 1980 को बागपत में माया त्यागी कांड हुआ था। माया त्यागी व उनके पति ईश्वर त्यागी अपने दो दोस्तों के साथ गाजियाबाद से बागपत कार द्वारा एक शादी समारोह में आ रहे थे। बागपत पहुंचने पर उनकी कार का टायर पंक्चर हो गयी थी। ईश्वर व अन्य दो दोस्त पंक्चन की दुकान पर कार रोककर पास में एक चाय की दुकान पर चले गए। इसी बीच वहां दो व्यक्ति आये और माया के साथ अभद्रता करने लगे। जिसे देखकर ईश्वर त्यागी व अन्य आ गए और मामला बढ़ गया। बाद में दोनों व्यक्ति वहां से चले गए। इसके बाद दुकानदार ने ईश्वर को बताया कि वह दोनों व्यक्ति बागपत थाने से हैं और अब बहुत बड़ा कुछ हो जाएगा, आप यहां से चले जाओ। जिसके बाद उन्होंने वहां से जाने का प्रयास किया, लेकिन कार स्टार्ट नहीं हो सकी। इसके बाद पुलिस वहां पहुंची और पुलिस कर्मियों ने ईश्वर त्यागी व उनके दोनों दोस्तों को गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गयी और माया को र्निवस्त्र बाजार में घुमाया। पुलिस कर्मियों ने दरिंदगी की सभी हदों को पार कर दिया था। जिसका सुबूत यह था कि मेडिकल रिपोर्ट में 25 चोट के निशान बताए गए थे। जबकि पुलिस ने बैंक डकैती में घटना को दर्ज कर दिया था। बाद में यह कांड देश की राजनीति में भूचाल लाने वाला बन गया और एक जन आंदोलन की शुरुआत हो गयी थी। पुरुष व महिलाएं भी सड़कों पर उतर गए थे। इस कांड को लेकर महीनभर आंदोलन चला था और न्याय की मांग की गई थी। सरकारों को भी समझ नही आ रहा था कि क्या किया जाए? पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने भी दिल्ली से बिगुल बजा दिया था। बागपत में पूर्व विधायक महक सिंह, उनकी पत्नी, ओमवीर तोमर सहित भारी संख्या में लोग आंदोलन में कूद पड़े थे।
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